लाल किताब के उपाय: कर्ज से मुक्ति पाने के अचूक टोटके

वैसे तो कर्ज लेने से यथा संभव बचना चाहिए और कर्ज लेना किसी को भी अच्छा नहीं लगता, परंतु कई बार किसी मजबूरी वश बच्चो की शिक्षा, गाड़ी, मकान या किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण कर्जा लेना ही पड़ता है। जीवन में कई बार कठिन समय आने पर व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस जाता है। अगर आप भी कर्ज के जाल में फंसे हुए है और कर्ज उतारने के उपाय खोज रहे है, तो लाल किताब (Lal Kitab) में इसके बहुत ही प्रभावशाली समाधान दिए गए है। आइए जानते है लाल किताब कर्ज मुक्ति के चमत्कारी उपायों के बारे में-

लाल किताब के टोटके कर्ज मुक्ति के लिए

लाल किताब कर्ज़ मुक्ति के उपाय

कई बार गलत समय पर कर्ज लेने से या किसी अन्य कारण से उसे उतारना बहुत ही मुश्किल हो जाता है और कई बार तो कुछ कर्जों को उतारते उतारते या ब्याज भरते भरते पूरी जिंदगी ही निकल जाती है परंतु कर्जा खत्म होने का नाम नहीं लेता।

कई बार छोटा सा कर्ज भी खत्म होने का नाम नहीं लेता क्योंकि जब कर्ज लिया जाता है तो किसी मजबूरी वश या जीवन स्तर को सुधारने के लिए कोई काम करने के लिए या काम को बढ़ाने के लिए लिया जाता है या मकान, दुकान आदि खरीदने के लिए कर्ज लिया जाता है और परेशानी तब आती है।

जब किसी कारण से कर्ज की रकम काम न चलने या किसी भी अन्य कारणवश खत्म हो जाती है और आजीविका का कोई स्थाई स्त्रोत न होने या खत्म होने या स्वास्थ्य कारणों से कर्जा चुकाना तो दूर की बात उसका ब्याज तक चुकाना भारी पड़ने लगता है। और ये कर्जा एक नासूर की तरह कर्जा लेने वाले व्यक्ति और उसके पूरे परिवार को चुभने लगता है।

ऐसे मैं स्थाई तौर पर आजीविका का साधन न होने से जहां घर खर्च और बच्चो की शिक्षा आदि के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही हो तो ऐसे मैं कर्जा चुकाना या ब्याज भरना भुक्तभोगी ही जान सकता है।

आईए जानते है लाल किताब के टोटके जिन से धीरे धीरे आपका कर्जा कम होता चला जाएगा और भगवान कृपा से जल्द ही ये खत्म हो जाएगा बस जरूरत है तो सिर्फ धैर्य और हिम्मत की।

कर्ज मुक्ति का मंत्र

सबसे पहला जो उपाय है "ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः" आपको इस बीज मंत्र का नित्य एक माला यानी 108 बार जाप करना है। यदि ऋण लेने वाला व्यक्ति किसी कारण से ये जाप नहीं कर सकता तो परिवार का कोई अन्य सदस्य इस मंत्र का जाप कर सकता है।

आप मंगलवार को भूलकर भी कर्ज न ले। बुधवार के दिन लिया गया कर्जा आसानी से चुकाया जा सकता है। आपके ऊपर जो भी कर्जा है तो उसकी पहली किश्त या किसी कारण से अगर आप पुराना कर्जा नही चुका पा रहे है तो उसकी किश्त मंगलवार से चुकाना शुरु किजिए इससे आपका कर्जा हनुमान जी की कृपा से धीरे धीरे खत्म हो जाएगा।

मंगलवार के दिन आप लाल मसूर की दाल का दान कीजिए या शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर इस दाल को अर्पित कीजिए और "ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः" मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव से अपने कर्ज मुक्ति की प्रार्थना कीजिए।

अपने घर के ईशान कोण को साफ सुथरा रखिए और वहां कोई भारी समान या कूड़ा कचरा या डस्टबिन आदि न रखिए।

बुधवार को हरे मूंग की सवा पाव दाल उबाल कर उसमे घी शक्कर मिला कर गाय को खिलाने से भी कर्जा जल्दी ही खत्म हो जाता हैं।

शनिवार को सरसो का तेल मिट्टी के दिए में भरकर ऊपर से मिट्टी का ढक्कन लगाकर शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय किसी तालाब के किनारे थोड़ी सी जमीन खोदकर उसमें दबा दे। ये उपाय करने से भी कर्जा खत्म होने लगता है।

घर की चोखट पर अभिमंत्रित घोड़े की नाल लगाने से भी कर्जा समाप्त होने लगता है।

घर में स्वार्थ सिद्धी यंत्र की स्थापना अपने पूजा स्थान में करे, इस से भी आपके कर्ज मुक्ति के रास्ते खुलने लगेगे।

मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सरसो का तेल और सिंदूर लगाए और माथे पर सिर्फ सिंदूर लगाए और साथ में हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करे, इस से भी आपका कर्जा जल्दी उतरता है।

अपने घर या कार्यालय में गाय के आगे खड़े भगवान श्री कृष्ण का बंसी बजाते हुए चित्र लगाने से भी कर्जा जल्दी उतरता है।

कर्ज से मुक्ति के लिए आप अपनी जेब में लाल रूमाल रखिए जब तक की आप का कर्जा पूर्णतया नही उतरता।

इस के अलावा गाय को हरा चारा खिलाने और श्री यंत्र की स्थापना और पूजा से भी कर्ज से मुक्ति मिलती है।

लाल किताब के कर्ज़ मुक्ति के उपाय

लाल किताब के अचूक उपाय

समस्या (Problem) लाल किताब उपाय (Lal Kitab Remedy)
आर्थिक तंगी / धन लाभ तिजोरी में चांदी का चौकोर टुकड़ा रखें या कुत्ते को गुड़ वाली रोटी खिलाएं।
नौकरी/व्यापार में बाधा साफ पानी में कच्चा दूध डालकर स्नान करें और जल में कोयला प्रवाहित करें।
घर में क्लेश / शांति कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं और घर के मुख्य द्वार पर गंगाजल छिड़कें।
नजर दोष / ऊपरी बाधा हनुमान जी के कंधे का सिंदूर लेकर माथे पर लगाएं और काले तिल का दान करें।
कर्ज से मुक्ति शनिवार को बरगद के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल - FAQ

कर्ज मुक्ति के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

लाल किताब के अनुसार 'ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।

कर्ज की किश्त किस दिन से शुरू करनी चाहिए?

कर्ज की पहली किश्त मंगलवार से शुरू करें। मंगलवार को नया कर्ज न लें।

बुधवार को कौन सा उपाय करने से कर्ज जल्दी उतरता है?

सवा पाव हरे मूंग की दाल उबाल कर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाएं।

शनिवार को कर्ज मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए?

सरसो का तेल दिए में भरकर तालाब के किनारे दबाएं और बरगद के नीचे दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ें।

घर में कौन सी चीज रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है?

अभिमंत्रित घोड़े की नाल, श्री यंत्र, और बंसी बजाते श्री कृष्ण का चित्र लगाने से लाभ होता है।

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सोम प्रदोष व्रत कथा, आरती और महत्व - Som Pradosh Vrat Katha

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इस व्रत को करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर प्रकार के ग्रह दोष दूर होकर आरोग्यता और मनोकामना पूर्ति होती है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सोम प्रदोष व्रत का महत्व अद्भुत माना जाता है।

Som Pradosh Vrat Katha Shiv Ji Image

सोम प्रदोष व्रत कथा

पूर्व काल में एक विधवा ब्राह्मणी प्रत्येक प्रातः ऋषियों की आज्ञा ले अपने पुत्र को साथ लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती।

भिक्षा में उन्हें जो मिलता, उससे अपना कार्य चलाती और शिवजी का प्रदोष व्रत भी करती थी।

एक दिन जब वह भिक्षा के लिए अपने पुत्र के साथ जा रही थी तो मार्ग में उसे विदर्भ देश का राजकुमार मिला। शत्रुओं ने उसे उसकी राजधानी से बाहर निकाल दिया था और उसके पिता को मार दिया था।

अतः वह मारा मारा फिर रहा था। ब्राह्मणी उसे अपने साथ ले आई और अपने पुत्र के साथ उसका पालन पोषण करने लगी।

एक दिन उन दोनों -राजकुमार और ब्राह्मण बालक ने वन में गंधर्व कन्याओं को देखा। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया परंतु राजकुमार साथ नहीं आया क्योंकि वह अंशुमती नाम की गंधर्व कन्या से बातें करने लगा था।

दूसरे दिन वह फिर अपने घर से वहां आया जहां अंशुमती अपने माता-पिता के साथ बैठी थी।

एक दिन भगवान शिव ने अंशुमती के माता-पिता को स्वपन में आदेश दिया कि राजकुमार धर्मगुप्त और अंशुमती का विवाह कर दिया जाए।

भगवान शिव के आदेश को मानते हुए दिन अगले दिन अंशुमती के माता-पिता ने राजकुमार से कहा कि तुम विदर्भ देश के राजकुमार धर्मगुप्त हो। हम भगवान शंकर जी की आज्ञा से अपनी पुत्री अंशुमती का विवाह तुम्हारे साथ कर देते हैं।

राजकुमार धर्मगुप्त का विवाह अनुमति के साथ हो गया। बाद में राजकुमार ने गंधर्व राज की सेना की सहायता से विदर्भ देश पर अधिकार कर लिया और ब्राह्मण के पुत्र को अपना मंत्री बना लिया।

यथार्थ में यह सब उस ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत करने का फल था। बस उसी समय से यह प्रदोष व्रत संसार में प्रतिष्ठित हुआ।

ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से जैसे ब्राह्मणी के, ब्राह्मणी पुत्र और राजकुमार धर्मगुप्त के दिन फिरे, वैसे ही भगवान शिव इस व्रत को धारण करने वाले के भी शीघ्र ही दिन फेरते है।

शिव जी की आरती

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलाशा
धतूर का भोजन, भस्मी मैं वासा
ॐ जय शिव ओंकारा
जटा मैं गंगा बहत हैं, गल मुण्डन माला
शेष नाग लिपटावट, ओढ़त मृगशाला
ॐ जय ओंकारा
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी
ॐ जय शिव ओंकारा
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे
ॐ जय शिव ओंकारा।। ॐ जय शिव ओंकारा

सोम प्रदोष व्रत से जुड़े सवाल-जवाब

सोम प्रदोष व्रत कब किया जाता है?

सोम प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। जब त्रयोदशी सोमवार के दिन पड़े तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं।

सोम प्रदोष व्रत करने से क्या लाभ होता है?

सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है, सभी ग्रह दोष दूर होते हैं, आरोग्यता मिलती है, मनोकामना पूरी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

प्रदोष काल यानि सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और बाद तक शिव जी की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म चढ़ाएं। व्रत कथा सुनें और शिव जी की आरती करें। दिन में फलाहार करें।

क्या प्रदोष व्रत में नमक खा सकते हैं?

नहीं, प्रदोष व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। दिन में फलाहार और शाम को पूजा के बाद बिना नमक का सात्विक भोजन कर सकते हैं।

सोम प्रदोष व्रत कितने करने चाहिए?

श्रद्धानुसार 11 या 26 सोम प्रदोष व्रत करने चाहिए। कम से कम 1 वर्ष तक लगातार व्रत करना बहुत शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

सोम प्रदोष व्रत 2026 न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक शांति और भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है। सोम प्रदोष व्रत के दिन व्रत का पालन करें और विधि-विधान से पूजा संपन्न करें। ॐ नमः शिवाय

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Gudiya Date 2026: गुड़िया कब है 2026

Gudiya Kab Hai 2026: हर वर्ष संपूर्ण भारतवर्ष में श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। आप जानते ही है कि भारत त्योहारों का देश है और यहां हर त्यौहार बड़ी ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश (यूपी) में इस दिन एक अनोखी परंपरा मनाई जाती है खासतौर पर कानपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में। इस दिन गुड़िया को पीटने की परंपरा निभाई जाती है जो कि एक प्राचीन कहानी पर आधारित है।

सांप नाग देवता की मुद्रा में सिर उठाए हुए: नागपंचमी (गुड़िया) 2026 व्रत कथा

नागपंचमी पर क्या है गुड़िया को पीटने की परंपरा?

एक कहानी के अनुसार एक लड़की का भाई भगवान शिव का परम भक्त था और वह प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ के मंदिर जाया करता था और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा अर्चना किया करता था।

भगवान शिव के मंदिर में उसे हर रोज 'नाग देवता' के दर्शन होते थे। वह लड़का रोज नाग देवता को दूध पिलाने लगा और धीरे धीरे दोनों में काफी प्रेम हो गया।

नाग देवता को उस लड़के से इतना प्रेम और विश्वास हो गया कि वो अपनी मणि छोड़ इस लड़के के पैरों से लिपट जाता था।

एक दिन श्रावण के महीने में दोनों भाई बहन एक साथ भगवान भोलेनाथ के मंदिर गए। मंदिर में जाते ही 'नाग' देवता लड़के को देखते ही उसके पैरों से लिपट गया।

लड़के की बहन ने जब यह नज़ारा देखा तो वह बहुत डर गई।उसे लगा कि नाग उसके भाई को डस लेगा। तब लड़की ने अपने भाई की जान बचाने के लिए नाग को डंडे से पीट पीट कर मार डाला।

इसके बाद जब लड़के ने पूरी कहानी अपनी बहन को बताई तो वह रोने लगी। वहां उपस्थित लोगों ने कहा कि 'नाग' देवता का रूप होते है, इसलिए तुम्हें इसका दंड तो अवश्य मिलेगा।

परंतु तुमसे यह पाप अनजाने में हुआ है क्योंकि तुम ने भय वश अपने भाई की जान बचाने के लिए नाग हत्या की है। इसलिए भविष्य में लड़की की जगह कपड़े की बनी हुई गुड़िया को पीटा जायेगा। इस तरह से गुड़िया पीटने की परंपरा शुरू हुई।

उत्तर प्रदेश के कानपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में खासतौर पर नागपंचमी के दिन पतंगे उड़ाई जाती है और गुड़ियों को पीटा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन बहनें कपड़े की गुड़िया सड़क पर डालती है और भाई उस गुड़िया को डंडों से पीटते है।

इस परंपरा से जुड़ी एक अन्य कहानी के अनुसार तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो गई थी। समय बीतने पर तक्षक की चौथी पीढ़ी की कन्या का विवाह राजा परीक्षित की चोथी पीढ़ी में हुआ।

उस कन्या ने अपनी ससुराल में एक महिला को इस रहस्य के बारे में बताकर किसी को भी इस बारे में न बताने को कहा, लेकिन उस महिला ने किसी और को बता दिया और धीरे धीरे यह खबर पूरे नगर में फैल गई।

तक्षक के तत्कालीन राजा ने इस रहस्य को उजागर करने पर नगर की सभी लड़कियों को इकठ्ठा करके कोड़ों से पिटवा कर मरवा दिया। राजा इस बात से क्रोधित हो गया था कि औरतों के पेट में कोई बात नही पचती है।

नाग पंचमी 2026 (Nag Panchami 2026)

सावन के महीने में वैसे तो दो नागपंचमी की तिथि आती है, एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष की, परंतु श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की नागपंचमी का विशेष महत्व है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार नाग को देवता माना जाता है। श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की नागपंचमी इस साल 17 अगस्त सोमवार 2026 को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी तिथि और मुहूर्त (Nag Panchmi Date and Muhurat)

शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 16 अगस्त 2026 रविवार को शाम 04 बज कर 52 मिनट से होगा और समाप्ति 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 पर होगी।

नागपंचमी शुक्ल पक्ष 2026 का पूजा मुहूर्त सोमवार 17 अगस्त 2026 को सुबह 06 बज कर 05 मिनट से सुबह 8 बज कर 40 मिनट तक रहेगा। ऐसे में नागपंचमी का व्रत 17 अगस्त 2026 सोमवार को रखा जाएगा।

नागपंचमी की पूजा विधि (Nag Panchmi ki Puja Vidhi)

नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। नागपंचमी के दिन वासुकी, अनंत, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलिर, कर्कट, शंख नामक अष्ट नाग देवताओं की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

नागपंचमी से एक दिन पहले अर्थात चतुर्थी तिथि को एक समय भोजन करना चाहिए। अगले दिन पंचमी तिथि को नागपंचमी का व्रत रखना चाहिए। व्रत की समाप्ति के पश्चात पंचमी तिथि की रात्रि को भोजन किया जा सकता है।

नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी लेकर उस पर मिट्टी से नाग देवता की आकृति (प्रतिमा) बनाएं। इसके बाद नाग देवता पर हल्दी, सिंदूर, अक्षत (बिना टूटा हुआ साबुत चावल) और फूल अर्पित करें।

इसके बाद कच्चे दूध अर्थात बिना गर्म किए हुए दूध में थोड़ा सा घी और चीनी मिलाकर नाग देवता का अभिषेक करें और शेषनाग देवता और भगवान शिव का स्मरण करें।

पूजा समाप्ति के बाद अंत में नाग देवता की कथा का पाठ करें और आरती पढ़ें और किसी जरूरतमंद व्यक्ति को यथा शक्ति दान दे।

नागपंचमी की कथा

प्राचीन समय में एक सेठ के सात पुत्र थे और सभी का विवाह सम्पन्न हो चुका था। सेठ के सबसे छोटे बेटे की पत्नी बहुत ही अच्छे चरित्र और नेक दिल थी, परंतु उसका कोई भाई नहीं था और इस कारण वह अक्सर उदास हो जाया करती थी।

एक दिन घर की सबसे बड़ी बहू ने घर को पीली मिट्टी से लीपने के लिए सभी बहुओं को अपने साथ चलने को कहा। सभी बहुएं हाथ में खुरपी और परात लेकर पास में ही जाकर मिट्टी खोदने लगी।

जब वे मिट्टी खोद रही थी, तभी वहां मिट्टी के नीचे से एक सांप निकल आया जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी। यह देखकर छोटी बहु ने उसे रोकते हुए कहा, मत मारो इसे, यह बेचारा निरपराध है।

यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नही मारा और वह सर्प एक और जा बैठा। तब छोटी बहु ने उस सर्प से कहा कि हम अभी लौट कर आती है, तुम यहां से जाना मत।

यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और घर के कामकाज में फंसकर सर्प से जो वादा किया था, उसे भूल गई।

दूसरे दिन उसे वह बात याद आई तो वह सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उसी स्थान पर बैठा देखकर बोली सर्प भैया नमस्कार ! सर्प ने कहा, तू मुझे भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात करने के कारण तुझे अभी डस लेता।

वह बोली-भैया, मुझसे भूल हो गई, इसलिए क्षमा मांगती हूं। तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो मांगना है, मांग ले। वह बोली-भैया, मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया।

कुछ दिन बीतने के बाद वह सर्प मनुष्य का रूप धारण करके उसके घर आया और बोला कि मेरी बहन को भेज दो। सबने कहा कि इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला कि में दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं। बचपन में ही बाहर चला गया था।

उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगो ने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया। उसने रास्ते में छोटी बहू को बताया कि में वही सर्प हूं, इसलिए तुम डरना नहीं और जहां पर चलने में कठिनाई हो, मेरी पूंछ पकड़ लेना।

छोटी बहू ने उसके कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई। वहां का धन ऐश्वर्य को देखकर वह चकित रह गई।

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- में एक जरूरी काम से बाहर जा रही हूं, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात याद नहीं रहीं और उसने सर्प भाई को गर्म दूध पिला दिया, जिससे सर्प का मुंह बुरी तरह से जल गया।

यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई, परंतु सर्प के समझाने पर वह शांत हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहन को अब उसके घर भेज देना चाहिए।

तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सारा सोना, चांदी, जवाहरात, वस्त्र और आभूषण देकर सम्मान सहित सर्प भाई उसे उसके घर छोड़ने आया।

इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा कि तेरा भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए।

सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दी। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- इन वस्तुओं को झाड़ने के लिए झाडू भी सोने की होनी चाहिए। तब सर्प ने झाड़ू भी सोने की लाकर रख दी।

सर्प ने छोटी बहू को हीरे मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उस हार की प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि सेठ की छोटी बहू का हार यहां आना चाहिए।

राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि सेठ के घर जाकर उससे वह हार लेकर शीघ्र ही मेरे सामने उपस्थित हो। मंत्री ने सेठ जी के घर जाकर सेठ जी से कहा कि महारानी जी आपकी छोटी बहू का हार पहनेंगी। सेठ जी ने राज भय के कारण छोटी बहू से हार मंगवा कर मंत्री को दे दिया।

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने अपने सर्प भाई को याद किया और सर्प भाई के आने पर प्रार्थना की- हे भैया, रानी ने आपका दिया हुआ हार मुझसे छीन लिया है।

तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में हो तो वह हार सर्प बन जाए और जब रानी मुझे मेरा वह हार वापिस लौटा दे तो हीरे और मणियों का हो जाए।

सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने वह हीरे मणियों वाला हार पहना, वैसे ही वह हार सर्प बन गया। यह देख कर रानी चीख पड़ी और जोर जोर से रोने लगी।

यह देखकर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो। सेठ जी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा। सेठ जी छोटी बहू को साथ लेकर राजा के सामने उपस्थित हुए।

राजा ने छोटी बहू से पूछा- तूने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूंगा। छोटी बहू बोली- राजन! धृष्टता क्षमा कीजिए। यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरे और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है।

यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा कि इसे अभी मेरे सामने पहन कर दिखाओ। जैसे ही छोटी बहू ने वह सर्प बना हार अपने गले में डाला, वह हीरे मणियों के हार में बदल गया।

यह देखकर राजा को उसकी बात पर विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर बहुत सी स्वर्ण मुद्राएं छोटी बहू को पुरुस्कार में दी। छोटी बहू खुशी-खुशी अपने हार, स्वर्ण मुद्राएं और अपने ससुर के साथ अपने घर लौट आई।

उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से बहुत धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाया और कहा — ठीक-ठीक बता कि तुझे यह धन कौन देता है?

तब वह सर्प भाई को याद करने लगी। उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा — यदि कोई मेरी धर्म बहन के आचरण पर संदेह करेगा, मैं उसे खा लूंगा।

यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बहुत आदर-सत्कार किया। उसी दिन से नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

नाग पंचमी की आरती

श्री नागदेव आरती पंचमी की कीजे

तन मन धन सब अर्पण कीजे

नेत्र लाल भिरकुटी विशाला

चले बिन पैर सुने बिन काना

उनको अपना सर्वस्व दीजे

पाताल लोक में तेरा वासा

शंकर विघ्न विनायक नासा

भक्तों का सर्व कष्ट हर लीजे

वेद पुराण सब महिमा गावे

नारद शारद शीश निवांवे

सावल सा से वर तुम दीजे

नौंवी के दिन ज्योत जगावें

खीर चूरमे का भोग लगावे

रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजे

आरती श्री नागदेव की कीजे

नाग पंचमी का महत्व (Importance of Nag Panchmi)

हिंदू मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से व्यक्ति को नाग भय नहीं रहता और सर्पदंश से रक्षा होती है।

जिन लोगों की जन्म पत्रिका में कालसर्प दोष होता है, उन्हें सावन माह की शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी के दिन पूजा करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है।

इस दिन यदि भगवान शिव के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विराजमान शेषनाग देवता को कच्चे दूध से नहलाया जाए और दूध चढ़ाया जाए, तो दिव्य कृपा प्राप्त होती है। इस दिन घर के दरवाजे पर सांप का चित्र बनाने की भी परंपरा है।

नाग देवता को धनदायक देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि जहां भूमिगत धन होता है, वहां सर्प की उपस्थिति होती है। नाग देवता की पूजा करने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

मंगलवार व्रत कथा और आरती – हनुमान जी का मंगलकारी व्रत

सर्व सुख, राज सम्मान, तथा पुत्र प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत करना शुभ है। इसे 21 सप्ताह लगातार करना चाहिए। लाल पुष्प, लाल चंदन, लाल फल अथवा लाल मिठाई से हनुमान जी का पूजन करें।

लाल वस्त्र धारण करें। मंगलवार व्रत कथा पढ़ने-सुनने के बाद, हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक तथा बजरंग बाण का पाठ करने से शीघ्र फल प्राप्त होता है।

मंगलवार व्रत कथा - हनुमान जी की कृपा और मंगल दोष शांति

मंगलवार व्रत कथा

एक ब्राह्मण दंपति के कोई संतान न थी, जिस कारण पति-पत्नी दोनों दुखी रहते थे। एक समय वह ब्राह्मण हनुमान जी की पूजा हेतु वन में चला गया। वहां वह पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना किया करता था।

घर में उसकी पत्नी भी पुत्र प्राप्ति के लिए मंगलवार को व्रत किया करती थी। मंगल के दिन व्रत के अंत में भोजन बनाकर हनुमान जी को भोग लगाने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण करती थी।

एक बार कोई व्रत आ गया जिसके कारण ब्राह्मणी भोजन न बना सकी और हनुमान जी का भोग भी नहीं लगा। वह अपने मन में ऐसा प्रण करके सो गई कि अब अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करूंगी।

वह भूखी-प्यासी छह दिन तक बिना कुछ खाए-पिए पड़ी रही। मंगलवार के दिन उसे मूर्छा आ गई। हनुमान जी उसकी लगन और निष्ठा को देखकर प्रसन्न हो गए। उन्होंने उसे दर्शन दिए और कहा - "मैं तुमसे अति प्रसन्न हूं।

मैं तुम्हें एक सुंदर बालक देता हूं, जो तुम्हारी बहुत सेवा किया करेगा।" हनुमान जी मंगल को बाल रूप में उसको दर्शन देकर अंतर्ध्यान हो गए।

सुंदर बालक पाकर ब्राह्मणी अति प्रसन्न हुई। ब्राह्मणी ने बालक का नाम मंगल रखा। कुछ समय पश्चात ब्राह्मण वन से लौटकर आया तो एक प्रसन्नचित्त सुंदर बालक को घर में खेलता देखकर, ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से पूछा - "यह बालक कौन है?"

पत्नी ने कहा - "मंगलवार के व्रत से प्रसन्न हो हनुमान जी ने दर्शन देकर मुझे यह बालक दिया है।" ब्राह्मण को पत्नी की बात पर विश्वास नहीं हुआ। उसने सोचा कि यह कुलटा, व्यभिचारिणी अपनी कलुषता छिपाने के लिए बात बना रही है।

एक दिन ब्राह्मण कुएं पर पानी भरने जाने लगा तो ब्राह्मणी ने कहा कि मंगल को भी अपने साथ ले जाओ। ब्राह्मण मंगल को भी साथ ले गया परंतु वह उस बालक को नाजायज मानता था इसलिए उसे कुएं में डालकर पानी भर घर वापस आ गया।

ब्राह्मणी ने ब्राह्मण से पूछा कि मंगल कहां है? तभी मंगल मुस्कुराता हुआ घर वापस आ गया। उसे वापस आया देखकर ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गया। रात्रि में उस ब्राह्मण को हनुमान जी ने स्वप्न में कहा - "यह बालक मैंने दिया है, तुम पत्नी को कुलटा क्यों कहते हो?"

ब्राह्मण यह सत्य जानकर अत्यंत हर्षित हुआ। उसके बाद वह ब्राह्मण दंपति मंगल का व्रत रख अपना जीवन आनंदपूर्वक व्यतीत करने लगे।

जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक मंगलवार व्रत कथा को पढ़ता है या सुनता है और नियम से व्रत रखता है, हनुमान जी की कृपा से उसके सब कष्ट दूर होकर सर्व सुख प्राप्त होते हैं।

मंगलवार और मंगलिया की कहानी

एक बुढ़िया थी। वह मंगल देवता को अपना इष्ट देवता मानकर सदैव मंगलवार का व्रत रखती और मंगल देव का पूजन किया करती थी। उसका एक पुत्र था जो मंगलवार को उत्पन्न हुआ था।

इस कारण वह उसको मंगलिया के नाम से पुकारा करती थी। बुढ़िया मंगलवार के दिन न तो घर को गोबर से लीपती और ना ही पृथ्वी खोदा करती।

एक दिन मंगल देवता उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने के लिए साधु का रूप धारण करके आए और उसके द्वार पर आकर आवाज दी। बुढ़िया घर से बाहर आई और साधु को खड़ा देखकर हाथ जोड़कर बोली - "महाराज क्या आज्ञा है?"

साधु ने कहा मुझे बहुत भूख लगी है, भोजन बनाना है। उसके लिए थोड़ी सी पृथ्वी लीप दे तो तेरा पुण्य होगा। यह सुन बुढ़िया ने कहा - "महाराज आज मैं मंगलवार की व्रती हूं, इसलिए मैं चौका नहीं लगा सकती। आप कहें तो जल का छिड़काव कर दूं। वहां पर आप भोजन बना लीजिए।"

साधु ने कहा - "मैं गोबर से लीपे चौके पर खाना बनाता हूं।" बुढ़िया ने कहा - "पृथ्वी लीपने के अलावा और कोई सेवा हो तो मैं वह करने के लिए उपस्थित हूं।"

साधु ने कहा - "सोच समझकर उत्तर दो।" बुढ़िया कहने लगी - "महाराज, पृथ्वी लीपने के अलावा जो भी आप आज्ञा करेंगे, उसका मैं अवश्य पालन करूंगी।" बुढ़िया ने ऐसा वचन तीन बार दिया।

तब साधु ने कहा - "तू अपने लड़के को बुलाकर पेट के बल लिटा दे, मैं उसकी पीठ पर भोजन बनाऊंगा।" साधु की बात सुनकर बुढ़िया चुप रह गई। तब साधु ने कहा - "बुला लड़के को, अब सोच-विचार क्या करती हैं?"

बुढ़िया मंगलिया, मंगलिया कहकर अपने पुत्र को पुकारने लगी। थोड़ी देर बाद उसका लड़का आ गया। बुढ़िया ने कहा - "जा बेटे तुझको बाबाजी बुलाते हैं।"

लड़के ने बाबाजी से जाकर पूछा - "क्या आज्ञा है महाराज?" बाबाजी ने कहा जाओ अपनी माताजी को बुला लाओ।

जब माताजी आ गई तो साधु ने कहा कि तू ही इसको लिटा दे। बुढ़िया ने मंगल देवता का स्मरण करते हुए लड़के को औंधा लिटा दिया और उसकी पीठ पर अंगीठी रख दी।

उसने साधु से कहा - "महाराज अब आपको जो कुछ करना है वो कीजिए, मैं जाकर अपना काम करती हूं।" साधु ने लड़के की पीठ पर रखी हुई अंगीठी में आग जलाई और उस पर भोजन बनाया।

जब भोजन बन चुका तो साधु ने बुढ़िया से कहा कि अपने लड़के को बुलाओ, "वह भी आकर भोग ले जाए।" बुढ़िया कहने लगी कि "यह कितने आश्चर्य की बात है महाराज कि आपने उसकी पीठ पर आग जलाई और उसी को प्रसाद के लिए बुलाते हो?

आप कृपा कर उसका स्मरण भी मुझको न कराएं और भोग लगाकर जहां जाना हो जाइए।" साधु द्वारा आग्रह करने पर बुढ़िया ने ज्यों ही मंगलिया कहकर अपने पुत्र को आवाज लगाई त्यों ही वह एक ओर से दौड़ता हुआ आ गया।

साधु ने लड़के को प्रसाद दिया और कहा - "माई तेरा व्रत सफल हो गया। तेरे हृदय में दया है और अपने इष्टदेव में अटल श्रद्धा है। इसके कारण तुझको कभी कोई कष्ट नहीं पहुंचेगा।"

हनुमान जी की आरती

आरती कीजे हनुमान लला की
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की
जाके बल से गिरिवर कांपे
रोग दोष जाके निकट न झांके
अंजनी पुत्र महाबल दाई
संतन के प्रभु सदा सहाई
दे बीरा रघुनाथ पठाए
लंका जारी सिया सुधि लाए
लंका सो कोट समुद्र सी खाई
जात पवनसुत वार न लाई
लंका जारी असुर संहारे
सियाराम जी के काज संवारे
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आनि संजीवन प्राण उबारे
पैठी पाताल तोरी जम कारे
अहिरावण की भुजा उखारे
बांए भुजा असुर दल मारे
दाहिने भुजा संतजन तारे
सुर नर मुनि जन आरती उतारे
जय जय जय हनुमान उचारे
कंचन थार कपूर लौ छाई
आरती करती अंजना माई
जो हनुमान जी की आरती गावे
बसी बैकुंठ परमपद पावे
लंका विध्वंस किन्ह रघुराई
तुलसीदास प्रभु आरती गाई

मंगलवार व्रत से जुड़े सवाल-जवाब

मंगलवार व्रत कितने दिन करना चाहिए?

मंगलवार का व्रत 21 मंगलवार तक लगातार करना शुभ माना जाता है। इससे हनुमान जी की कृपा और मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।

मंगलवार व्रत में क्या खाना चाहिए?

व्रत के दिन नमक नहीं खाना चाहिए। फलाहार, लाल मसूर, गुड़ और गेहूं का भोग हनुमान जी को लगाकर प्रसाद ग्रहण करें। एक समय मीठा भोजन कर सकते हैं।

क्या मंगलवार व्रत से मंगल दोष खत्म होता है?

हाँ, श्रद्धापूर्वक मंगलवार व्रत करने, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से मंगल दोष के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मंगलवार व्रत कथा सुनने के क्या लाभ हैं?

मंगलवार व्रत कथा पढ़ने या सुनने से पुत्र प्राप्ति, सर्व सुख, रक्त संबंधी रोगों से मुक्ति और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

मंगलवार व्रत की शुरुआत कैसे करें?

किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से व्रत शुरू करें। सुबह स्नान करके लाल वस्त्र पहनें, हनुमान जी को लाल फूल, सिंदूर चढ़ाएं और व्रत का संकल्प लें।

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