संदेश

Chaitra Navratri 2026: तिथि, घटस्थापना समय, पूजा विधि

चित्र
Chaitra Navratri 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र नवरात्रि से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है। नवरात्रों में मां दुर्गा के भक्त घटस्थापना करते है और व्रत रखते है और माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है।  चैत्र नवरात्रि 2026 नवरात्रि का पहला दिन अर्थात प्रतिपदा 19 मार्च 2026 गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस दिन घटस्थापना की जाती है और मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन अर्थात द्वितीया 20 मार्च 2026 शुक्रवार को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन अर्थात तृतीया 21 मार्च 2026 शनिवार को मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन अर्थात चतुर्थी 22 मार्च 2026 रविवार को माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पांचवे दिन अर्थात पंचमी 23 मार्च 2026 सोमवार को माता स्कंदमाता की पूजा अर्चना का विधान है। नवरात्रि के छठे दिन अर्थात षष्ठी 24 मार्च 2026 मंगलवार को माता कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि के सातवें दिन अर्थात सप्तमी 25 मार्च 2026 बुधवार को माता कालरात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि क...

ईरान में हालिया नेतृत्व संकट और अंगारक योग: बाजार पर असर?

चित्र
राहु मंगल अंगारक योग 23 फरवरी 2026 को सुबह 11:57 से शुरू हो चुका है जो 02 अप्रैल 2026 तक रहेगा। 23 फरवरी को जैसे ही मंगल शनि देव की राशि मकर से शनिदेव की दूसरी राशि कुंभ में आए, इस योग की शुरुआत हो चुकी है। अंगारक योग के कारण  युद्ध, आग से नुकसान, विमान दुर्घटना, लड़ाई-झगड़े, छोटी सी बात का बतंगड़ बनना, स्टॉक मार्केट में जबरदस्त उठापटक आदि हो सकता है। मंगल ग्रह का संबंध युद्ध और अग्नि से जुड़ा है और राहु ग्रह का संबंध मानसिक भ्रम और अप्रत्याशित घटनाओं से जुड़ा है और इन दोनों का कुंभ राशि में एक साथ होना इन घटनाओं में अचानक से वृद्धि दर्शाता है। भूकंप और जनहानि के योग भी अंगारक दोष का कारण हो सकते है।  ईरान तनाव, राहु मंगल अंगारक योग और ट्रेडिंग  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खाकर ईरान से जुड़ी भू-राजनैतिक हलचल अक्सर वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती आई है। हाल ही में ईरान के शीर्ष नेता से जुड़ी घटना से इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इस समय ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण राहु मंगल अंगारक योग  चल रहा है, तो कई लोग यह प्रश्न पूछते है कि क्या इस युद्ध जैसी स्थिति...

शनि देव जी की आरती | Shani Dev Aarti in Hindi

चित्र
शनि देव की आरती का पाठ करने से जीवन में चल रही बाधाएं, साढ़ेसाती और ढैया के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और वह अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र ही प्रसन्न होते है। शनिवार के दिन श्रद्धा से नियमपूर्वक शनिदेव की आरती करने से कष्टों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए इस आरती का नियमित पाठ फलदायी माना गया है।  शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी  सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी  श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी  नीलांबर धार नाथ गज की असवारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी क्रीट मुकुट शीश राजित दीपत है लिलारी  मुक्तन  की माला गले शोभित बलिहारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन  मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी  लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी  देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी  विश्वनाथ धरत  ध्यान शरण हैं तुम्हारी  जय जय श्री ...

Shani Chalisa in Hindi: शनि चालीसा पाठ, लाभ, महत्व और विधि

चित्र
शनि चालीसा हिंदू धर्म में भगवान श्री शनिदेव को प्रसन्न करने का एक प्रभावशाली स्त्रोत्र है। शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैया और जन्म कुंडली में निर्मित अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है। शनिवार के दिन श्रद्धा और विश्वास से शनि चालीसा पढ़ने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है और कर्मों का शुभ फल प्राप्त होता है। जो भक्त शनि देव की कृपा प्राप्त करना चाहते है, उनके लिए शनि चालीसा विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।  श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa) दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजे नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनुहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखुहु जन की लाज॥ जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा तनु श्याम विराजे। माथे रतन मुकुट छबि छाजे॥ परम विशाल मनोहर भाला। ठेढ़ी दृष्टि भृकुटि विक्राला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करे अरिंही संहारा॥ पिंगल कृष्णो छाया नन्दन। यम कौनस्थ रौद्र दुखभंजन॥ सौरी मन्द शनि दश नामा। भानु ...