श्री गणेश जी की आरती | जय गणेश जय गणेश देवा
किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले संकटहर्ता विघ्न विनाशक भगवान गणेश जी की आरती गाने या सुनने का विधान बताया गया है। इससे कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और कार्य निर्विघ्न संपन्न होते है। "ॐ गं गणपतये नमः" के पावन मंत्र के साथ की जाने वाली यह आरती भक्तों के जीवन से विघ्न बाधाओं को दूर कर सुख, शांति, समृद्धि और बुद्धि प्रदान करती है। किसी भी पूजा, व्रत या शुभ काम की शुरुआत में गणेश जी की आरती करने से भगवान गणपति की कृपा प्राप्त होती है और कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होता है। गणेश जी की आरती जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा एकदंत दयावंत चार भुजाधारी माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा लड्डुनन का भोग लगे सन्त करे सेवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा अंधन को आंख देत, कोढ़ीन को काया बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा बोलो गणे...