रविवार व्रत कथा: सूर्य देव की पूजा विधि, नियम और लाभ

रविवार व्रत कथा हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना से जुड़ी एक अत्यंत पवित्र कथा है. सूर्य देव को आरोग्य, यश, तेज और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है. जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य देव का रविवार का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में रोग, दरिद्रता और ग्रह दोष दूर होते हैं. सूर्य देव का व्रत और पूजा उपासना राज सम्मान दिलवाती है और राज भय दूर होता है.

रविवार व्रत कथा - सूर्य देवता अपने रथ पर

रविवार व्रत की कथा

एक बुढ़िया थी। वह प्रत्येक रविवार को सवेरे ही गोबर से घर लीपकर, स्नान आदि कर भगवान की पूजा करती थी। फिर भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगाकर, स्वयं भोजन करती थी।

श्री हरि की कृपा से उसका घर सभी प्रकार के सुख एवं धन धान्य से पूर्ण था और किसी प्रकार का कोई विघ्न या दुःख नहीं था। घर में सब प्रकार से आनंद रहता था।

उसकी एक पड़ोसन, जिसकी गाय का गोबर वह बुढ़िया रोज लाया करती थी, उस बुढ़िया की संपन्नता से जलने लगी।

वह विचार करने लगी की यह बुढ़िया रोज मेरी गाय का गोबर ले जाती है, इसलिए अगले ही दिन से वह अपनी गाय को अपने घर के भीतर बांधने लगी।

वह रविवार का दिन था। बुढ़िया गाय का गोबर न मिलने के कारण अपने घर को लीप न सकी। उस दिन उसने न तो भोजन बनाया और न स्वयं भोजन किया।

इस प्रकार उसने निराहार व्रत किया। रात्रि हो गई और वह बुढ़िया भूखी ही सो गई। रात्रि में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और भोजन न बनाने और भोग न लगाने का कारण पूछा।

बुढ़िया ने कहा कि उसे गोबर नही मिला और इस कारण वह आपका भोग न लगा सकी।

तब सूर्य भगवान ने कहा कि हे माता! हम तुमको ऐसी गाय देते हैं जो सभी इच्छाएं पूर्ण करती है, क्योंकि तुम हमेशा रविवार को पूरा घर गाय के गोबर से लीपकर, भोजन बनाकर और मेरा भोग लगाकर ही स्वयं भोजन करती हो, इससे मैं बहुत प्रसन्न हूं।

मैं निर्धन को धन और बांझ स्त्रियों को पुत्र देकर उनके दुखों को दूर करता हूं तथा अंत समय में मोक्ष देता हूं। बुढ़िया को स्वप्न में ऐसा वरदान देकर सूर्य देव अंतर्ध्यान हो गए।

प्रात:काल जब उस बुढ़िया की आंख खुली तो उसने देखा कि उसके घर के आंगन में एक अति सुन्दर गाय और बछड़ा बंधे हुए हैं।

गाय और बछड़े को देखकर वह वृद्धा अत्यंत प्रसन्न हुई और उनको घर के बाहर बांध दिया और उनके खाने के लिए चारा भी डाल दिया।

जब उसकी पड़ोसन ने बुढ़िया के घर के बाहर एक अति सुन्दर गाय और बछड़े को बंधा देखा तो द्वेष के कारण उसका ह्रदय जल उठा।

जब उसने देखा कि गाय ने सोने का गोबर किया है तो वह चोरी से उस गाय का गोबर उठाकर ले गई और अपनी गाय का गोबर उठाकर उसकी जगह रख गई।

वह प्रतिदिन ऐसा ही करती। सीधी साधी बुढ़िया को उसकी इस चालाकी की खबर तक नहीं हुई। सर्वव्यापी ईश्वर ने सोचा कि चालाक पड़ोसन के कर्म से बुढ़िया ठगी जा रही है।

एक दिन सूर्य भगवान ने संध्या के समय अपनी माया से बड़े जोर की आंधी चला दी। बुढ़िया ने आंधी के भय से अपनी गाय और बछड़े को घर के भीतर बांधने लगी।

पड़ोसन ने देखा कि बुढ़िया गाय को घर के भीतर बांधने लगी है और उसका सोने का गोबर उठाने का दांव नही चलता तो वह ईर्ष्या और डाह से जल उठी।

अन्य कोई उपाय न देख पड़ोसन ने उस देश के राजा की सभा में जाकर कहा "महाराज मेरे पड़ोस में एक वृद्धा के पास ऐसी गाय है जो नित्य सोने का गोबर देती है।

आप वह सोना प्राप्त कर उससे प्रजा का पालन करिए। वह वृद्धा इतने सोने का क्या करेगी।"

उसकी बात सुनकर राजा ने अपने दूतों को उस बुढ़िया के घर से गाय लाने का आदेश दिया। बुढ़िया प्रात: भगवान का भोग लगा भोजन ग्रहण करने जा रही थी कि राजा के कर्मचारी गाय और बछड़े को खोलकर ले गए।

वृद्धा बहुत रोई-चिल्लाई किंतु राजा के कर्मचारियों के सामने भला कोई क्या कहता? उस दिन वृद्धा गाय के वियोग में भोजन न कर सकी और रात भर रो-रोकर ईश्वर से गाय को पुन: पाने के लिए प्रार्थना करती रही।

राजा सोने का गोबर देने वाली गाय को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ लेकिन अगले ही दिन सुबह जैसे ही वह उठा तो उसे सारा महल गोबर से भरा दिखाई देने लगा।

राजा यह देखकर घबरा गया। सूर्य भगवान ने रात्रि में राजा को स्वप्न में कहा - "हे राजा! इस गाय को उस वृद्धा को लौटाने में ही तेरा भला हैं। उसके रविवार के व्रत से प्रसन्न होकर मैंने यह गाय उसे दी थी।"

प्रात: होते ही राजा ने वृद्धा को महल में बुलाकर बहुत से धन के साथ सम्मान सहित गाय-बछड़ा उसे लौटा दिया और अपने कार्य के लिए क्षमा प्रार्थना की।

इसके बाद राजा ने उसकी पड़ोसन को बुलाकर उचित दंड दिया। इतना करने के बाद राजा के महल से गंदगी दूर हुई।

उसी दिन से राजा ने सभी नगर निवासियों को आदेश दिया कि राज्य की समृद्धि और अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रविवार का व्रत करें।

रविवार को सूर्य भगवान का व्रत करने से नगर के सभी लोग सुखी जीवन व्यतीत करने लगे। अब कोई बीमारी या प्राकृतिक प्रकोप उस नगर पर नहीं होता था और सारी प्रजा सुख समृद्धि से रहने लगी।

रविवार व्रत की आरती

कहुं लगि आरती दास करेंगे
सकल जगत जाकी जोति विराजे
सात समुद्र जाके चरण बसे
काह भयो जल कुंभ भरे हो राम
कोटि भानु जाके नख की शोभा
कहा भयो मंदिर दीप धरे हो राम
भार अठारह रामा बलि जाके
कहा भयो शिर पुष्पधरे हो राम
छप्पन भोग जाके प्रतिदिन लागे
कहा भयो नैवेद्य धरे हो राम
अमित कोटि जाके बाजा बाजें
कहा भयो झंकारा करे हो राम
चार वेद जाके मुख की शोभा
कहा भयो ब्रह्मवेद पढ़े हो राम
शिव सनकादिक आदि ब्रह्मादिक
नारद मुनि जाको ध्यान धरे हो राम
हिम मंदार जाके पवन झंकोरे
कहा भयो शिव चंवर ढुरे हो राम
लख चौरासी बन्ध छुड़ाए
केवल हरियश नामदेव गाए हो राम

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शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के 5 नियम और सही पूजा विधि

महाशिवरात्रि आने वाली है और हम सभी महादेव को प्रसन्न करने की तैयारियों में जुट गए हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व 06 मार्च 2027 शनिवार को मनाया जाएगा। बचपन से ही हम देखते आए हैं कि शिव पूजा में 'बेलपत्र' का कितना महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि हर कोई अलग-अलग तरीके से बेलपत्र की पत्तियां चढ़ाता है?

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का तरीका - Mahashivratri 2026

अक्सर मन में सवाल आता है कि क्या बेलपत्र उल्टा चढ़ना चाहिए या सीधा? क्या 3 से ज्यादा पत्तियों वाला बेलपत्र ज्यादा फलदायी होता है? सच तो यह है कि महादेव जितने 'भोले' हैं, उनकी पूजा के नियम उतने ही वैज्ञानिक और सटीक हैं।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के मुख्य नियम

आज के इस लेख में, मैं आपके साथ शास्त्रों में बताए गए वे गुप्त नियम साझा करूंगा, जो आपकी पूजा को साधारण से विशेष बना देंगे। अगर आप भी इस साल महाशिवरात्रि पर अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने की इन 5 बड़ी गलतियों से जरूर बचे।

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र (Bilva Patra) का महत्व सर्वोपरि है। अक्सर लोग श्रद्धा में बेलपत्र तो चढ़ाते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं। शास्त्रों के अनुसार, महादेव को बेलपत्र अर्पित करने के कुछ विशेष नियम बताए गए है।

यहां "शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका" विस्तार से दिया गया है-

बेलपत्र की अवस्था: बेलपत्र कहीं से भी फटा हुआ या कटा हुआ नहीं होना चाहिए। इसमें चक्र या सफेद धारियां (कृमि दोष) नहीं होनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, खंडित बेलपत्र स्वीकार्य नहीं होता।

दलों की संख्या: हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं। ये तीन पत्तियां सत्व, रज और तम गुणों का प्रतीक मानी जाती हैं।

चढ़ाने की दिशा: बेलपत्र का चिकना हिस्सा (ऊपर वाला भाग) हमेशा शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए। खुरदरा हिस्सा ऊपर की तरफ होना चाहिए।

डंठल की दिशा: बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंठल आपकी विपरीत दिशा में या जलाधारी (जहां से पानी गिरता है) की तरफ होनी चाहिए।

भोलेनाथ की पूजा की सही विधि

अगर आप पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें:

शुद्धिकरण: सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र को भी साफ पानी की टंकी या पानी से भरे किसी बर्तन में डालकर साफ कर ले ताकि धूल मिट्टी दूर हो जाए।

चंदन का लेप: बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर सफेद या पीला चंदन लगाएं। आप बीच वाली पत्ती पर 'ॐ' भी लिख सकते हैं।

पकड़ने का तरीका: बेलपत्र को हमेशा अनामिका (Ring finger), मध्यमा (Middle finger) और अंगूठे की मदद से पकड़े। डंठल के आखिरी हिस्से (गांठ) को तोड़ देना चाहिए।

अर्पण मंत्र: बेलपत्र चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" या "त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥" मंत्र का जाप करें। शिव परिवार को नमस्कार और स्मरण करें।

बेलपत्र से जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां

विशेष नोट: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और सोमवार के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। अगर इन दिनों में बेलपत्र की आवश्यकता हो, तो एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें या मंदिर में चढ़े हुए बेलपत्र को धोकर पुनः चढ़ा दें (बेलपत्र कभी बासी नहीं होता)।


क्या करें (Do's) ✅  क्या न करें (Don'ts) ❌
हमेशा 3 पत्तियों वाला अखंडित बेलपत्र ही चढ़ाएं। कीड़े लगे हुए या छेद वाले पत्ते भूलकर भी न चढ़ाएं।
बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ रखें। बेलपत्र की डंठल की सख्त गांठ (डूड) को न चढ़ाएं, उसे तोड़ दें।
चढ़ाने से पहले चंदन से 'ॐ' या बिंदी लगाएं। चतुर्दशी, अष्टमी या सोमवार को बेलपत्र न तोड़े।
पूजा के समय अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा सामग्री न छुएं।
'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए अर्पण करें। ताम्र (तांबे) के पात्र से दूध न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का यह तरीका न केवल धार्मिक रूप से सही है, बल्कि यह आपकी भक्ति को और अधिक अनुशासित बनाता है। महादेव भाव के भूखे है, लेकिन सही विधि से की गई पूजा मन को अधिक शांति देती है।

महाशिवरात्रि: बेलपत्र पूजा चेकलिस्ट

क्या आपने अपनी पूजा की तैयारी पूरी कर ली है? इन 7 बिंदुओं को एक बार जरूर देख लें:

1. अखंडित बेलपत्र: क्या आपके पास 3 पत्तियों वाले साफ-सुथरे बेलपत्र हैं? (सुनिश्चित करें कि उनमें छेद न हो)।

2. शुद्ध जल/गंगाजल: शिवलिंग के अभिषेक के लिए ताजा जल या गंगाजल।

3. चंदन: पत्तियों पर 'ॐ' लिखने के लिए पीला या सफेद चंदन।

4. सही दिशा: क्या आपको याद है? पत्ती का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए।

5. गांठ हटाना: क्या आपने बेलपत्र की डंठल के आखिरी मोटे हिस्से (गांठ) को तोड़ दिया है?

6. मुख की दिशा: पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

7. मंत्र जप: बेलपत्र चढ़ाते समय मन में 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जाप।

इस चेकलिस्ट का स्क्रीनशॉट ले लें ताकि मंदिर जाते समय आप कोई भी नियम न भूलें!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या चढ़ाया हुआ बेलपत्र दोबारा धोकर चढ़ा सकते हैं?
उत्तर: हां, शास्त्रों के अनुसार अगर नया बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो चढ़ाएं हुए बेलपत्र को जल से धोकर पुनः शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।


प्रश्न 2: शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाना शुभ होता है?
उत्तर: आप कम से कम 1 या फिर 3, 5, 11, 21 या 108 की संख्या में बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।


प्रश्न 3: बेलपत्र किस दिन नहीं तोड़ना चाहिए?
उत्तर: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और सोमवार के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। पूजा के लिए इसे एक दिन पहले तोड़कर रख लें।


निष्कर्ष:महादेव को प्रसन्न करना कठिन नहीं है, क्योंकि वे 'भोलेनाथ' है और मात्र एक लौटा जल और एक बेलपत्र से भी मान जाते है। लेकिन जब हम शास्त्रों द्वारा बताई गई विधि और नियमों के साथ कोई कार्य करते है, तो हमारी एकाग्रता और श्रद्धा और भी बढ़ जाती है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का यह सही तरीका न केवल हमारी परंपरा है, बल्कि भगवान शिव के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को भी दर्शाता है। इस महाशिवरात्रि, पूरे विधि-विधान के साथ महादेव की आराधना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
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लाल किताब के उपाय: कर्ज से मुक्ति पाने के अचूक टोटके

वैसे तो कर्ज लेने से यथा संभव बचना चाहिए और कर्ज लेना किसी को भी अच्छा नहीं लगता, परंतु कई बार किसी मजबूरी वश बच्चो की शिक्षा, गाड़ी, मकान या किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण कर्जा लेना ही पड़ता है। जीवन में कई बार कठिन समय आने पर व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस जाता है। अगर आप भी कर्ज के जाल में फंसे हुए है और कर्ज उतारने के उपाय खोज रहे है, तो लाल किताब (Lal Kitab) में इसके बहुत ही प्रभावशाली समाधान दिए गए है। आइए जानते है लाल किताब कर्ज मुक्ति के चमत्कारी उपायों के बारे में-

लाल किताब के टोटके कर्ज मुक्ति के लिए

लाल किताब कर्ज़ मुक्ति के उपाय

कई बार गलत समय पर कर्ज लेने से या किसी अन्य कारण से उसे उतारना बहुत ही मुश्किल हो जाता है और कई बार तो कुछ कर्जों को उतारते उतारते या ब्याज भरते भरते पूरी जिंदगी ही निकल जाती है परंतु कर्जा खत्म होने का नाम नहीं लेता।

कई बार छोटा सा कर्ज भी खत्म होने का नाम नहीं लेता क्योंकि जब कर्ज लिया जाता है तो किसी मजबूरी वश या जीवन स्तर को सुधारने के लिए कोई काम करने के लिए या काम को बढ़ाने के लिए लिया जाता है या मकान, दुकान आदि खरीदने के लिए कर्ज लिया जाता है और परेशानी तब आती है।

जब किसी कारण से कर्ज की रकम काम न चलने या किसी भी अन्य कारणवश खत्म हो जाती है और आजीविका का कोई स्थाई स्त्रोत न होने या खत्म होने या स्वास्थ्य कारणों से कर्जा चुकाना तो दूर की बात उसका ब्याज तक चुकाना भारी पड़ने लगता है। और ये कर्जा एक नासूर की तरह कर्जा लेने वाले व्यक्ति और उसके पूरे परिवार को चुभने लगता है।

ऐसे मैं स्थाई तौर पर आजीविका का साधन न होने से जहां घर खर्च और बच्चो की शिक्षा आदि के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही हो तो ऐसे मैं कर्जा चुकाना या ब्याज भरना भुक्तभोगी ही जान सकता है।

आईए जानते है लाल किताब के टोटके जिन से धीरे धीरे आपका कर्जा कम होता चला जाएगा और भगवान कृपा से जल्द ही ये खत्म हो जाएगा बस जरूरत है तो सिर्फ धैर्य और हिम्मत की।

कर्ज मुक्ति का मंत्र

सबसे पहला जो उपाय है "ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः" आपको इस बीज मंत्र का नित्य एक माला यानी 108 बार जाप करना है। यदि ऋण लेने वाला व्यक्ति किसी कारण से ये जाप नहीं कर सकता तो परिवार का कोई अन्य सदस्य इस मंत्र का जाप कर सकता है।

आप मंगलवार को भूलकर भी कर्ज न ले। बुधवार के दिन लिया गया कर्जा आसानी से चुकाया जा सकता है। आपके ऊपर जो भी कर्जा है तो उसकी पहली किश्त या किसी कारण से अगर आप पुराना कर्जा नही चुका पा रहे है तो उसकी किश्त मंगलवार से चुकाना शुरु किजिए इससे आपका कर्जा हनुमान जी की कृपा से धीरे धीरे खत्म हो जाएगा।

मंगलवार के दिन आप लाल मसूर की दाल का दान कीजिए या शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर इस दाल को अर्पित कीजिए और "ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः" मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव से अपने कर्ज मुक्ति की प्रार्थना कीजिए।

अपने घर के ईशान कोण को साफ सुथरा रखिए और वहां कोई भारी समान या कूड़ा कचरा या डस्टबिन आदि न रखिए।

बुधवार को हरे मूंग की सवा पाव दाल उबाल कर उसमे घी शक्कर मिला कर गाय को खिलाने से भी कर्जा जल्दी ही खत्म हो जाता हैं।

शनिवार को सरसो का तेल मिट्टी के दिए में भरकर ऊपर से मिट्टी का ढक्कन लगाकर शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय किसी तालाब के किनारे थोड़ी सी जमीन खोदकर उसमें दबा दे। ये उपाय करने से भी कर्जा खत्म होने लगता है।

घर की चोखट पर अभिमंत्रित घोड़े की नाल लगाने से भी कर्जा समाप्त होने लगता है।

घर में स्वार्थ सिद्धी यंत्र की स्थापना अपने पूजा स्थान में करे, इस से भी आपके कर्ज मुक्ति के रास्ते खुलने लगेगे।

मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सरसो का तेल और सिंदूर लगाए और माथे पर सिर्फ सिंदूर लगाए और साथ में हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करे, इस से भी आपका कर्जा जल्दी उतरता है।

अपने घर या कार्यालय में गाय के आगे खड़े भगवान श्री कृष्ण का बंसी बजाते हुए चित्र लगाने से भी कर्जा जल्दी उतरता है।

कर्ज से मुक्ति के लिए आप अपनी जेब में लाल रूमाल रखिए जब तक की आप का कर्जा पूर्णतया नही उतरता।

इस के अलावा गाय को हरा चारा खिलाने और श्री यंत्र की स्थापना और पूजा से भी कर्ज से मुक्ति मिलती है।

लाल किताब के कर्ज़ मुक्ति के उपाय

लाल किताब के अचूक उपाय

समस्या (Problem) लाल किताब उपाय (Lal Kitab Remedy)
आर्थिक तंगी / धन लाभ तिजोरी में चांदी का चौकोर टुकड़ा रखें या कुत्ते को गुड़ वाली रोटी खिलाएं।
नौकरी/व्यापार में बाधा साफ पानी में कच्चा दूध डालकर स्नान करें और जल में कोयला प्रवाहित करें।
घर में क्लेश / शांति कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं और घर के मुख्य द्वार पर गंगाजल छिड़कें।
नजर दोष / ऊपरी बाधा हनुमान जी के कंधे का सिंदूर लेकर माथे पर लगाएं और काले तिल का दान करें।
कर्ज से मुक्ति शनिवार को बरगद के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल - FAQ

कर्ज मुक्ति के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

लाल किताब के अनुसार 'ॐ ऋण मुक्तेश्वर नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।

कर्ज की किश्त किस दिन से शुरू करनी चाहिए?

कर्ज की पहली किश्त मंगलवार से शुरू करें। मंगलवार को नया कर्ज न लें।

बुधवार को कौन सा उपाय करने से कर्ज जल्दी उतरता है?

सवा पाव हरे मूंग की दाल उबाल कर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाएं।

शनिवार को कर्ज मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए?

सरसो का तेल दिए में भरकर तालाब के किनारे दबाएं और बरगद के नीचे दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ें।

घर में कौन सी चीज रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है?

अभिमंत्रित घोड़े की नाल, श्री यंत्र, और बंसी बजाते श्री कृष्ण का चित्र लगाने से लाभ होता है।

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सोम प्रदोष व्रत कथा, आरती और महत्व - Som Pradosh Vrat Katha

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इस व्रत को करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर प्रकार के ग्रह दोष दूर होकर आरोग्यता और मनोकामना पूर्ति होती है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सोम प्रदोष व्रत का महत्व अद्भुत माना जाता है।

Som Pradosh Vrat Katha Shiv Ji Image

सोम प्रदोष व्रत कथा

पूर्व काल में एक विधवा ब्राह्मणी प्रत्येक प्रातः ऋषियों की आज्ञा ले अपने पुत्र को साथ लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती।

भिक्षा में उन्हें जो मिलता, उससे अपना कार्य चलाती और शिवजी का प्रदोष व्रत भी करती थी।

एक दिन जब वह भिक्षा के लिए अपने पुत्र के साथ जा रही थी तो मार्ग में उसे विदर्भ देश का राजकुमार मिला। शत्रुओं ने उसे उसकी राजधानी से बाहर निकाल दिया था और उसके पिता को मार दिया था।

अतः वह मारा मारा फिर रहा था। ब्राह्मणी उसे अपने साथ ले आई और अपने पुत्र के साथ उसका पालन पोषण करने लगी।

एक दिन उन दोनों -राजकुमार और ब्राह्मण बालक ने वन में गंधर्व कन्याओं को देखा। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया परंतु राजकुमार साथ नहीं आया क्योंकि वह अंशुमती नाम की गंधर्व कन्या से बातें करने लगा था।

दूसरे दिन वह फिर अपने घर से वहां आया जहां अंशुमती अपने माता-पिता के साथ बैठी थी।

एक दिन भगवान शिव ने अंशुमती के माता-पिता को स्वपन में आदेश दिया कि राजकुमार धर्मगुप्त और अंशुमती का विवाह कर दिया जाए।

भगवान शिव के आदेश को मानते हुए दिन अगले दिन अंशुमती के माता-पिता ने राजकुमार से कहा कि तुम विदर्भ देश के राजकुमार धर्मगुप्त हो। हम भगवान शंकर जी की आज्ञा से अपनी पुत्री अंशुमती का विवाह तुम्हारे साथ कर देते हैं।

राजकुमार धर्मगुप्त का विवाह अनुमति के साथ हो गया। बाद में राजकुमार ने गंधर्व राज की सेना की सहायता से विदर्भ देश पर अधिकार कर लिया और ब्राह्मण के पुत्र को अपना मंत्री बना लिया।

यथार्थ में यह सब उस ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत करने का फल था। बस उसी समय से यह प्रदोष व्रत संसार में प्रतिष्ठित हुआ।

ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से जैसे ब्राह्मणी के, ब्राह्मणी पुत्र और राजकुमार धर्मगुप्त के दिन फिरे, वैसे ही भगवान शिव इस व्रत को धारण करने वाले के भी शीघ्र ही दिन फेरते है।

शिव जी की आरती

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलाशा
धतूर का भोजन, भस्मी मैं वासा
ॐ जय शिव ओंकारा
जटा मैं गंगा बहत हैं, गल मुण्डन माला
शेष नाग लिपटावट, ओढ़त मृगशाला
ॐ जय ओंकारा
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी
ॐ जय शिव ओंकारा
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे
ॐ जय शिव ओंकारा।। ॐ जय शिव ओंकारा

सोम प्रदोष व्रत से जुड़े सवाल-जवाब

सोम प्रदोष व्रत कब किया जाता है?

सोम प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। जब त्रयोदशी सोमवार के दिन पड़े तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं।

सोम प्रदोष व्रत करने से क्या लाभ होता है?

सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है, सभी ग्रह दोष दूर होते हैं, आरोग्यता मिलती है, मनोकामना पूरी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

प्रदोष काल यानि सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और बाद तक शिव जी की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म चढ़ाएं। व्रत कथा सुनें और शिव जी की आरती करें। दिन में फलाहार करें।

क्या प्रदोष व्रत में नमक खा सकते हैं?

नहीं, प्रदोष व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। दिन में फलाहार और शाम को पूजा के बाद बिना नमक का सात्विक भोजन कर सकते हैं।

सोम प्रदोष व्रत कितने करने चाहिए?

श्रद्धानुसार 11 या 26 सोम प्रदोष व्रत करने चाहिए। कम से कम 1 वर्ष तक लगातार व्रत करना बहुत शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

सोम प्रदोष व्रत 2026 न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक शांति और भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है। सोम प्रदोष व्रत के दिन व्रत का पालन करें और विधि-विधान से पूजा संपन्न करें। ॐ नमः शिवाय

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