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Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत कथा विधि और महत्व

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सोलह सोमवार व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत है। मनोरथ सिद्धि के लिए सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद के लिए सोलह सोमवार का व्रत रखा जाता है। खासकर कुंवारी कन्याएं अपने मनपंसद वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती है।  सोलह सोमवार व्रत की कथा (Solah Somvar Vrat Katha)   मृत्यु लोक में भ्रमण करने की इच्छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्यु लोक में पधारे। भ्रमण करते करते दोनों विदर्भ देश के अंतर्गत अमरावती नाम की अति सुंदर नगरी में पहुंचे।  अमरावती नगरी अमरा पुरी के समान सब प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के राजकुमार द्वारा बनवाया गया अति रमणीक शिव जी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ उस मंदिर में निवास करने लगे।  एक समय माता पार्वती भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देख मजाक करने की इच्छा से बोली - "है प्रभु महाराज ! आज तो हम दोनों चौसर खेलेंगे "  शिव जी ने अपनी प्राण प्रिय पत्नि की बात को मान  लिया और चौसर खेलने लगे।  उसी समय उस मंदिर का पुजारी ब्राह्मण मंदिर में...

Santoshi Mata Ki Aarti: मैं तो आरती उतारू रे संतोषी माता की

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संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। हर शुक्रवार को उनकी पूजा और आरती करके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। माना जाता है कि संतोषी माता की आरती श्रद्धा पूर्वक गाने से जीवन की परेशानियां दूर होती है और घर में खुशहाली आती है। यहां प्रस्तुत है संतोषी माता की आरती जिसको पढ़ने से मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।  संतोषी माता की आरती  जय संतोषी माता जय संतोषी माता अपने सेवक जन को सुख संपति दाता  जय संतोषी माता  सुंदर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हों हीरा पन्ना दमके तन सिंगार लीन्हों जय संतोषी माता  गेरू लाल छटा छवि बदन कमल सोहै  मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन मोहै  जय संतोषी माता स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर ढुरे प्यारे  धूप, दीप, नैवेद्य, मधुमेवा भोग धरे न्यारे ओम जय संतोषी माता गुड और चना परमप्रिय तामें संतोष कियो संतोषी कहलाई भक्तन विभव दियो जय संतोषी माता  शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही भक्त मंडली आई कथा सुनत वोही जय संतोषी माता मंदिर जगमग ज्योति मंगल...

Sade Sati: कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव

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शनि की साढ़ेसाती एक चुनौतीपूर्ण अवधि मानी जाती है जो लगभग साढ़े सात साल तक चलती है। जैसा कि हम जानते है कि शनि ग्रह एक राशि में 2.5 यानी ढ़ाई साल तक रहते है।  इस दौरान जन्म राशि के चंद्र ग्रह से बारहवें, लग्न और दूसरे घर में शनि ग्रह को साढ़े सात साल लगते है। इसी अवधि को साढ़ेसाती कहा जाता है। वर्तमान में मेष  राशि पर साढ़ेसाती का पहला, मीन राशि  पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा या अंतिम चरण चल रहा है। कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव (Sadhe Sati effects on Aquarius)  कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती  24 जनवरी 2020 से शुरू हुई थी और कुंभ राशि से शनि की साढ़ेसाती पूरी तरह से 03 जून 2027 को समाप्त होगी। जैसा कि आप जान ही चुके है, शनि ग्रह एक राशि में 2.5 यानी ढ़ाई साल रहते है और इस तरह से साढ़े सात साल की साढ़ेसाती की अवधि के दौरान तीन चरण आते है।  जिन्हे साढ़ेसाती का पहला, दूसरा और तीसरा चरण कहते है और हर चरण का इस अवधि में अपना प्रभाव रहता है। आइए जानते है संक्षिप्त रूप से साढ़ेसाती के इन तीन चरणों के बारे में  कुंभ राशि...

Ekadashi Kab Hai: एकादशी 2026 लिस्ट हिंदी में

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Ekadashi Kab Hai : एकादशी हिंदुओं के लिए एक बहुत ही पवित्र दिन है जो कि हर महीने में दो बार अर्थात कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते और घटते चरणो के ग्यारहवें दिन होता है। इस दिन काफी हिन्दू एकादशी का व्रत रखते हैं और जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।  एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। एकादशी को शरीर को शुद्ध करने और कायाकल्प का दिन माना जाता है। इस दिन उपवास करने वालों के द्वारा पौष्टिक आहार और अनाज का सेव नही किया जाता। इस दिन आप फल सब्जी और दूध से बने खाद्य पदार्थो का सेवन कर सकते हैं। ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से पालन किया जाता है।  सभी प्रकार के संयम की ये अवधि एकादशी के दिन सूर्योदय से शुरु हो कर एकादशी के अगले दिन सूर्योदय तक रहती है। ऐसा भी माना जाता है कि एकादशी का उपवास करने से हानिकारक ग्रहों के दुष्परिणाम से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख, शान्ति और समृद्धि आती है। एकादशी के व्रत में चावल, दालें, लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।  एकादशी कब है?...

करवा चौथ व्रत 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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पति पत्नी के आपसी प्रेम की निशानी के रूप में करवा चौथ हर साल कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ का व्रत सबसे पहले शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती ने रखा था जिसके फलस्वरूप उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी।  करवा चौथ कब है?  करवा चौथ 2026 का त्यौहार इस साल 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार को मनाया जायेगा। कार्तिक चतुर्थी का प्रारंभ गुरुवार 29 अक्टूबर मध्यरात्रि 01:06 am से शुरू होकर 29 अक्टूबर गुरुवार रात्रि 10:09 pm तक रहेगा।  उदया तिथि के हिसाब से करवा चौथ 2026 का त्यौहार 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार को मनाया जायेगा।  करवा चौथ पूजा मुहूर्त  करवा चौथ 2026 का पूजा मुहूर्त  29 अक्टूबर को शाम 05:38 बजे से लेकर 06:56 बजे तक रहेगा। करवा चौथ व्रत पूजन की कुल अवधि 1 घंटा 18 मिनट की रहेगी।  करवा चौथ व्रत की विधि  सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खाएं।  करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले ही स्नान कर ले। देवी देवताओं की नियमित पूजा जो आप रोज करती है, उसे करने के बाद पूरे दिन के लिए निर्जला व्रत रखें।  शाम के समय भगव...

Lucky Number: मैं अपना भाग्य नंबर कैसे ढूंढूं?

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जहां तक लक्की नंबर की बात है, अगर हम अपने जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं को ध्यान से देखेंगे तो हम पाएंगे कि कुछ खास तारीखों को हमे विशेष सफलता या खुशियां मिलती  है और अगर हम उनका मिलान अपने लक्की नंबर से करेंगे तो पाएंगे कि इन सब के पीछे कही न कही हमें वही से भाग्य का सहयोग मिला है।  हम अक्सर अपने जीवनकाल में ये देखते है कि कुछ व्यक्ति अपने कार्य को बहुत मेहनत से करते है और अपने कार्य में भी बहुत ईमानदार होते है और उनमें कोई बुरी आदतें भी नही होती परन्तु इस के बावजूद उन्हें अपने जीवन काल में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  लक्की नंबर और भाग्य  इसे भाग्य की विडंबना ही तो कहेंगे कि जम कर मेहनत और ईमानदारी से काम करने के बावजूद भी दुनिया भर की पारिवारिक परेशानियां, व्यक्तिगत परेशानियां, आर्थिक परेशानियां और बहुत सी समस्याएं उनके जीवन में हमेशा डेरा डाले रहती है। उनके जीवन में सुख सुविधा का नितांत अभाव रहता है और हर समय आर्थिक परेशानी का सामना करते रहते है। परंतु दूसरी तरफ हम अक्सर ये भी देखते है कि कुछ व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में बहुत ही लापरवाह, आ...

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