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गुरुवार व्रत कथा: बृहस्पति देव की पूजा विधि, नियम व महत्व

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गुरुवार को बृहस्पति देव की व्रत कथा और पूजा का विधान है। बृहस्पति देव को देवताओं का गुरू माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति देव को धन, वैभव, मान, सम्मान, समृद्धि, विवाह, संतान और जीवन के प्रत्येक सुख समृद्धि का कारक माना जाता है। गुरुवार व्रत कथा (Guruvar Vrat Katha)  एक नगर में एक बड़ा व्यापारी रहा करता था। वह जहाज में माल लदवा कर दूसरे देशों को भेजा करता था और ख़ुद भी जहाजों के साथ दूर दूर के देशों को जाया करता था। इस तरह वह खूब धन कमाकर लाता था।  उसकी गृहस्थी बड़े मजे से चल रही रही थी। वह दान पुण्य भी खूब दिल खोलकर करता था और गुरूवार के दिन बृहस्पति देव का व्रत रखता और कथा  पढ़ता और चना और मुनक्का का प्रसाद बांटा करता था।  परंतु उसका इस तरह से दान देना उसकी पत्नी को बिल्कुल भी पसंद न था। उसकी पत्नी तो किसी को एक दमड़ी देकर भी खुश न थी। यह भी पढ़ें - रविवार व्रत की कथा आरती   एक बार जब वह सौदागर माल से जहाज को भरकर किसी दूसरे देश को गया हुआ था तो पीछे से बृहस्पति देवता साधु का रूप धारण कर उसकी कंजूस पत्नी के पास पहुंचे और भिक्षा की याचना की।...

बुधवार व्रत कथा, पूजा विधि, नियम और लाभ | Budhvar Vrat Katha

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बुध ग्रह की शांति और समस्त सुखों की इच्छा रखने वाले सभी स्त्री पुरुषों को बुधवार का व्रत करना चाहिए। सफेद फूल, सफेद वस्त्र और सफेद चंदन से बुध देव जी महाराज की पूजा करनी चाहिए और बुधवार की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। बुधवार के व्रत वाले दिन एक बार ही भोजन करना चाहिए। बुधवार के व्रत के दिन हरी खाद्य वस्तुओं जैसे हरी सब्जियां, मूंग की दाल, पालक, हरे अंगूर आदि का सेवन करना अच्छा माना जाता है। बुधवार की कथा और आरती के बाद स्वयं और परिवार में प्रसाद का वितरण करें।  बुधवार व्रत कथा  एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने अपनी ससुराल गया। कुछ दिन रहने के बाद उसने अपने सास- ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने के लिए कहा।  उसके सास- ससुर तथा अन्य संबंधियों ने कहा कि आज बुधवार का दिन हैं, आज के दिन यात्रा नहीं करते। वह व्यक्ति नहीं माना और हठधर्मी से बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को विदा करवाकर अपने नगर को चल दिया।  रास्ते में उसकी पत्नी को बहुत जोर से प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा कि मुझे बहुत जोर से प्यास लगी है। वह व्यक्ति हाथ मैं लोटा लेकर गाड़ी से उतरकर जल लेने चला गया। ...

Gudiya Date 2026: गुड़िया कब है 2026

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Gudiya Kab Hai 2026 : हर वर्ष संपूर्ण भारतवर्ष में श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। आप जानते ही है कि भारत त्योहारों का देश है और यहां हर त्यौहार बड़ी ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।  उत्तर प्रदेश (यूपी) में इस दिन एक अनोखी परंपरा मनाई जाती है खासतौर पर कानपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में। इस दिन गुड़िया  को पीटने की परंपरा निभाई जाती है जो कि एक प्राचीन कहानी पर आधारित है।  नागपंचमी पर क्या है गुड़िया को पीटने की परंपरा? एक कहानी के अनुसार एक लड़की का भाई भगवान शिव का परम भक्त था और वह प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ के मंदिर जाया करता था और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा अर्चना किया करता था।  भगवान शिव के मंदिर में उसे हर रोज 'नाग देवता' के दर्शन होते थे। वह लड़का रोज नाग देवता को दूध पिलाने लगा और धीरे धीरे दोनों में काफी प्रेम हो गया।  नाग देवता को उस लड़के से इतना प्रेम और विश्वास हो गया कि वो अपनी मणि छोड़ इस लड़के के पैरों से लिपट जाता था।  एक दिन श्रावण के महीने में दोनों भाई बहन एक साथ भगवान भोलेनाथ के म...

मंगलवार व्रत कथा और आरती – हनुमान जी का मंगलकारी व्रत

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सर्व सुख, राज सम्मान, तथा पुत्र प्राप्ति के लिए  मंगलवार का व्रत करना शुभ है। इसे 21 सप्ताह लगातार करना चाहिए। लाल पुष्प, लाल चंदन, लाल फल अथवा लाल मिठाई से हनुमान जी का पूजन करें।  लाल वस्त्र धारण करें। मंगलवार व्रत कथा पढ़ने सुनने के बाद, हनुमान चालीसा , हनुमानाष्टक  तथा बजरंग बाण का पाठ करने से शीघ्र फल प्राप्त होता है।  मंगलवार व्रत कथा  एक ब्राह्मण दंपति के कोई संतान न थी, जिस कारण पति पत्नी दोनो दुखी रहते थे। एक समय वह ब्राह्मण हनुमान जी की पूजा हेतु वन में चला गया। वहां वह पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना किया करता था।  घर में उसकी पत्नी भी पुत्र प्राप्ति के लिए मंगलवार को व्रत किया करती थी। मंगल के दिन व्रत के अंत में भोजन बनाकर हनुमान जी को भोग लगाने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण करती थी।  एक बार कोई व्रत आ गया जिसके कारण ब्राह्मणी भोजन न बना सकी और हनुमान जी का भोग भी नहीं लगा। वह अपने मन में ऐसा प्रण करके सो गई कि अब अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करूंगी।  वह भूखी प्यासी छह दिन बिना कुछ खाए पिए पड़ी रही। मंगलवार के ...

शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए? शिवलिंग पूजा विधि

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Shivling Puja: जब भी जीवन में कठिनाई आती है, तो बड़े-बुजुर्ग और पुरोहित सोमवार के दिन भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि शिवलिंग पूजा (Shivling Puja) से मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, प्रसाद और धूप–दीप से की गई पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। इससे मानसिक शांति, सुख–समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोरथ सिद्धि प्राप्त होती है। सावन सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक क्यों करें? (Jalabhishek on Sawan Somvar) भगवान शिव को अत्यंत दयालु देव माना गया है। सावन का महीना (Sawan Month) शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। शिवलिंग पर जलाभिषेक (Shivling Jalabhishek) करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं। सावन सोमवार (Sawan Somvar) को शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध चढ़ाना अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। यह पूजा साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति करने में सहायक होती है। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं? (Shivling Par Kya Chadhana Chahiye)...