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Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत कथा विधि और महत्व

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सोलह सोमवार व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत है। मनोरथ सिद्धि के लिए सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद के लिए सोलह सोमवार का व्रत रखा जाता है। खासकर कुंवारी कन्याएं अपने मनपंसद वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती है।  सोलह सोमवार व्रत की कथा (Solah Somvar Vrat Katha)   मृत्यु लोक में भ्रमण करने की इच्छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्यु लोक में पधारे। भ्रमण करते करते दोनों विदर्भ देश के अंतर्गत अमरावती नाम की अति सुंदर नगरी में पहुंचे।  अमरावती नगरी अमरा पुरी के समान सब प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के राजकुमार द्वारा बनवाया गया अति रमणीक शिव जी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ उस मंदिर में निवास करने लगे।  एक समय माता पार्वती भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देख मजाक करने की इच्छा से बोली - "है प्रभु महाराज ! आज तो हम दोनों चौसर खेलेंगे "  शिव जी ने अपनी प्राण प्रिय पत्नि की बात को मान  लिया और चौसर खेलने लगे।  उसी समय उस मंदिर का पुजारी ब्राह्मण मंदिर में...

Basant Panchami 2026: Shubh Muhurat & Puja Vidhi

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान और विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। 

बसंत पंचमी 2026: सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त और विधि

बसंत पंचमी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त 

बसंत ऋतु भारत की छह ऋतुओं में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। भारत में बसंत ऋतु का समय फरवरी से मार्च तक माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है, न तो अधिक ठंड, न ही अधिक गर्मी। पेड़ों पर नई कोंपले आने लगती हैं और कोयल की  मधुर ध्वनि सुनाई देती है।

खेतों में सरसों की फसल लहलहाती नजर आती है। सरसों के पीले फूल मनमोहक दृश्य उत्पन्न करते हैं। बसंत पंचमी को

भारत में सरस्वती पूजा, बसंत महोत्सव, रति काम महोत्सव और बागीश्वरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

विवरण (Details) तिथि और शुभ समय (2026)
बसंत पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026
सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रातः 07:15 AM से दोपहर 12:50 PM तक
शुभ रंग पीला (Yellow) - उत्साह और ज्ञान का प्रतीक
मुख्य भोग पीले चावल, बेसन के लड्डू, या केसरिया हलवा
विशेष मंत्र ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

इस वर्ष बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। 
पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026 सुबह 02:28 बजे से
पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026 सुबह 01:46 बजे तक 
शुभ मुहूर्त: 23 जनवरी सुबह 07:15 से दोपहर 12:50 (5 घंटे 35 मिनट) 

सरस्वती पूजा (बसंत पंचमी) व्रत कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी ने धरती का निरीक्षण किया और सब कुछ नीरस पाया। उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार भुजाओं वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई — जिनके हाथ में वीणा, माला, पुस्तक और वरदान मुद्रा थी। उन्हें सरस्वती नाम दिया गया। 

सरस्वती माता ने वीणा बजाई, जिससे धरती पर संगीत, वाणी और ध्वनि का संचार हुआ। तभी से विद्या और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा होने लगी। 

एक कथा के अनुसार देवी सरस्वती भगवान श्रीकृष्ण से मोहित हो गई थीं। श्रीकृष्ण ने उनके प्रेम को स्वीकार तो नहीं किया, परंतु वरदान दिया कि माघ शुक्ल पंचमी को संपूर्ण विश्व विद्या की देवी के रूप में उनकी पूजा करेगा। इस दिन से बसंत पंचमी पर्व आरंभ हुआ। 

बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा विधि

पूजा स्थान को साफ करें और माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। कलश स्थापित कर भगवान गणेश का स्मरण करें। माता को स्नान, वस्त्र, आभूषण और पीले फूल अर्पित करें। फलों, बूंदी और खीर का भोग लगाएं। पुस्तकें और वाद्ययंत्रों की पूजा अवश्य करें। 

बसंत पंचमी पर क्या खाएं?

इस दिन पीले या केसरी मीठे चावल बनाना शुभ माना जाता है। चावल में केसर, पीला फूड कलर, काजू, बादाम, किशमिश मिलाकर प्रसाद तैयार करें। 

बसंत पंचमी के वस्त्र

पुरुष पीली शर्ट या स्वेटर पहन सकते हैं। महिलाएं पीली साड़ी या सलवार-कमीज़ धारण करें। पीला रंग इस दिन विशेष शुभ माना गया है। 

पीले रंग का महत्व

ज्योतिष के अनुसार पीला रंग देवगुरु बृहस्पति का प्रिय रंग है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और मानसिक सक्रियता में वृद्धि करता है। पीला रंग पहनने से बृहस्पति का शुभ प्रभाव प्राप्त होता है। 

बसंत पंचमी और शुभ कार्य

इस दिन विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं। कई राज्यों में खासकर गुजरात में पतंगबाजी का आयोजन होता है। बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी इस दिन किया जा सकता है। 

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बसंत पंचमी को क्या न करें?

स्नान के बाद पूजा किए बिना कुछ भी न खाएं। मांस-मदिरा त्यागें। वाणी से किसी को दुख न दें। इस दिन पेड़-पौधों की छटाई भी न करें। 


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