संदेश
2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Santoshi Mata Ki Aarti: मैं तो आरती उतारू रे संतोषी माता की

चित्र
संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। हर शुक्रवार को उनकी पूजा और आरती करके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। माना जाता है कि संतोषी माता की आरती श्रद्धा पूर्वक गाने से जीवन की परेशानियां दूर होती है और घर में खुशहाली आती है। यहां प्रस्तुत है संतोषी माता की आरती जिसको पढ़ने से मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।  संतोषी माता की आरती  जय संतोषी माता जय संतोषी माता अपने सेवक जन को सुख संपति दाता  जय संतोषी माता  सुंदर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हों हीरा पन्ना दमके तन सिंगार लीन्हों जय संतोषी माता  गेरू लाल छटा छवि बदन कमल सोहै  मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन मोहै  जय संतोषी माता स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर ढुरे प्यारे  धूप, दीप, नैवेद्य, मधुमेवा भोग धरे न्यारे ओम जय संतोषी माता गुड और चना परमप्रिय तामें संतोष कियो संतोषी कहलाई भक्तन विभव दियो जय संतोषी माता  शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही भक्त मंडली आई कथा सुनत वोही जय संतोषी माता मंदिर जगमग ज्योति मंगल...

Sade Sati: कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव

चित्र
शनि की साढ़ेसाती एक चुनौतीपूर्ण अवधि मानी जाती है जो लगभग साढ़े सात साल तक चलती है। जैसा कि हम जानते है कि शनि ग्रह एक राशि में 2.5 यानी ढ़ाई साल तक रहते है।  इस दौरान जन्म राशि के चंद्र ग्रह से बारहवें, लग्न और दूसरे घर में शनि ग्रह को साढ़े सात साल लगते है। इसी अवधि को साढ़ेसाती कहा जाता है। वर्तमान में मेष  राशि पर साढ़ेसाती का पहला, मीन राशि  पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा या अंतिम चरण चल रहा है। कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव (Sadhe Sati effects on Aquarius)  कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती  24 जनवरी 2020 से शुरू हुई थी और कुंभ राशि से शनि की साढ़ेसाती पूरी तरह से 03 जून 2027 को समाप्त होगी। जैसा कि आप जान ही चुके है, शनि ग्रह एक राशि में 2.5 यानी ढ़ाई साल रहते है और इस तरह से साढ़े सात साल की साढ़ेसाती की अवधि के दौरान तीन चरण आते है।  जिन्हे साढ़ेसाती का पहला, दूसरा और तीसरा चरण कहते है और हर चरण का इस अवधि में अपना प्रभाव रहता है। आइए जानते है संक्षिप्त रूप से साढ़ेसाती के इन तीन चरणों के बारे में  कुंभ राशि...

Ekadashi Kab Hai: एकादशी 2026 लिस्ट हिंदी में

चित्र
Ekadashi Kab Hai : एकादशी हिंदुओं के लिए एक बहुत ही पवित्र दिन है जो कि हर महीने में दो बार अर्थात कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते और घटते चरणो के ग्यारहवें दिन होता है। इस दिन काफी हिन्दू एकादशी का व्रत रखते हैं और जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।  एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। एकादशी को शरीर को शुद्ध करने और कायाकल्प का दिन माना जाता है। इस दिन उपवास करने वालों के द्वारा पौष्टिक आहार और अनाज का सेव नही किया जाता। इस दिन आप फल सब्जी और दूध से बने खाद्य पदार्थो का सेवन कर सकते हैं। ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से पालन किया जाता है।  सभी प्रकार के संयम की ये अवधि एकादशी के दिन सूर्योदय से शुरु हो कर एकादशी के अगले दिन सूर्योदय तक रहती है। ऐसा भी माना जाता है कि एकादशी का उपवास करने से हानिकारक ग्रहों के दुष्परिणाम से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख, शान्ति और समृद्धि आती है। एकादशी के व्रत में चावल, दालें, लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।  एकादशी कब है?...