संदेश
फ़रवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शनि देव जी की आरती | Shani Dev Aarti in Hindi

चित्र
शनि देव की आरती का पाठ करने से जीवन में चल रही बाधाएं, साढ़ेसाती और ढैया के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और वह अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र ही प्रसन्न होते है। शनिवार के दिन श्रद्धा से नियमपूर्वक शनिदेव की आरती करने से कष्टों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए इस आरती का नियमित पाठ फलदायी माना गया है।  शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी  सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी  श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी  नीलांबर धार नाथ गज की असवारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी क्रीट मुकुट शीश राजित दीपत है लिलारी  मुक्तन  की माला गले शोभित बलिहारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन  मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी  लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी  जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी  देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी  विश्वनाथ धरत  ध्यान शरण हैं तुम्हारी  जय जय श्री ...

Shani Chalisa in Hindi: शनि चालीसा पाठ, लाभ, महत्व और विधि

चित्र
शनि चालीसा हिंदू धर्म में भगवान श्री शनिदेव को प्रसन्न करने का एक प्रभावशाली स्त्रोत्र है। शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैया और जन्म कुंडली में निर्मित अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है। शनिवार के दिन श्रद्धा और विश्वास से शनि चालीसा पढ़ने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है और कर्मों का शुभ फल प्राप्त होता है। जो भक्त शनि देव की कृपा प्राप्त करना चाहते है, उनके लिए शनि चालीसा विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।  श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa) दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजे नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनुहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखुहु जन की लाज॥ जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा तनु श्याम विराजे। माथे रतन मुकुट छबि छाजे॥ परम विशाल मनोहर भाला। ठेढ़ी दृष्टि भृकुटि विक्राला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करे अरिंही संहारा॥ पिंगल कृष्णो छाया नन्दन। यम कौनस्थ रौद्र दुखभंजन॥ सौरी मन्द शनि दश नामा। भानु...

Chauth Mata Ki Kahani | चौथ माता व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

चित्र
चौथ माता की कहानी (Chauth Mata Ki Kahani) हर महीने की चौथ के व्रत के समय पूरी श्रद्धा और विश्वास से कही व सुनी जाती है। इसके बाद भगवान श्री गणेश जी की कहानी सुनी जाती है।  चौथ माता की कहानी  एक नगर में एक बूढ़ी मां अपने बेटे के साथ रहती थी। वह अपने बेटे की सलामती के लिए बहुत ही श्रद्धा और विश्वास से बारह महीने की चौथ के व्रत किया करती थी।  हर महीने चौथ व्रत के दिन वह पंसारी से थोड़ा सा गुड़ और देसी घी लाकर उसके चार लड्डू बनाती। एक लड्डू से वह चौथ माता की पूजा करती, एक हथकार के लिए निकालती, एक लड्डू अपने बेटे को खाने के लिए देती और एक लड्डू चांद उगने पर खुद खा लेती थी। एक बार उसका बेटा अपनी ताई से मिलने के लिए गया। ताई ने उस दिन बैसाख चौथ का व्रत रखा हुआ था। वह लड़का अपनी ताई से बोला कि मेरी मां तो बारह महीने चौथ के व्रत रखती है। ताई बोली कि तेरी मां तेरी कमाई से तर माल खाने के लिए बारह चौथ रखती है। तू परदेश चला जाए तो वह बारह चौथ तो क्या, एक भी चौथ नहीं करेगी। लड़के को लगा कि ताई सच कह रही है।  घर वापिस आकर लड़के ने अपनी मां से कहा कि मैं परदेश जा रहा हूं, यहां तो त...

Sade Sati: शनि की साढे साती दूर करने के अचूक उपाय

चित्र
शनि की साढ़ेसाती के नाम से ही हर कोई अनिष्ट की आशंका से डर जाता है, परंतु यह सही नहीं है। आपकी जन्म कुंडली में शनि देव किस घर में विराजमान है और वो मित्र राशि मैं है या शत्रु राशि मैं है, उनके साथ अगर कोई ग्रह भी उसी घर मैं है उनसे शनिदेव का संबंध मित्र या शत्रु का है, यह भी साथ में देखा जाता है। इसके अतिरिक्त शनिदेव की दृष्टि आपकी कुंडली के किस भाव पर पड़ रही है और किस ग्रह की दृष्टि शनिदेव पर पड़ रही है। इस के अतिरिक्त वर्तमान में आपकी किस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, इन सब बातो को भी ध्यान में रखकर शनि की साढ़ेसाती का विश्लेषण किया जाता है। अगर आपके ऊपर इस समय शनिदेव की साढ़ेसाती या ढैया चल रहा है और आप आर्थिक तंगी, बीमारी या किसी किस्म की परेशानी का अनुभव कर रहे है तो शनिदेव की साढ़ेसाती को दूर करने के कुछ सरल उपाय नीचे दिए गए है, आप उन्हें आजमा के देखिए, निश्चित ही आप राहत का अनुभव करेंगे। शनि की साढ़ेसाती दूर करने के उपाय 1.काले घोड़े की नाल की अंगूठी बनवा कर शनिवार को धारण करें अथवा पुरानी नाव की कील की अंगूठी भी धारण कर सकते है। 2. शनिवार के दिन रोटी पर सरसो का तेल च...

Aarti Lakhdatar Ki: आरती खाटू श्याम बाबा की

चित्र
लखदातार जिन्हे श्याम बाबा, खाटू श्याम और शीश के दानी के नाम से भी जाना जाता है, इनके भक्तों की इन पर अपार आस्था है। जो भी भक्तजन सच्चे मन से श्याम प्रभु के दरबार में आता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। श्याम बाबा की आरती नियमित गाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर घर में सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है। परिवार में हर तरह से सुख, शांति और समृद्धि का स्थाई निवास होता है। आरती खाटू नरेश की ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे।। ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।।  रत्न जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े।। ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।।  गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले।। ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।।   मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे।। ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।।  झांझ कटोरा और घड़ियावाल, शंख मृदंग धुरे। भक्त आरती गावे, जय जयकार करे।। ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय...

महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और निशिता काल समय

चित्र
देवों के देव महादेव और माता पार्वती के मिलन का महापर्व 'महाशिवरात्रि' इस साल 15 फरवरी 2026 को पूरी श्रद्धा, उमंग और उत्साह से मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव भक्त बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते है और पूजन करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि साल 2026 के महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ऐसा क्या दुर्लभ संयोग बन रहा है और पूजा के लिए सबसे उत्तम 'निशिता काल' का शुभ मुहूर्त क्या है? आज के इस लेख में हम आपको "महाशिवरात्रि 2026" के पावन पर्व की सभी जानकारी विस्तार से देंगे। महाशिवरात्रि 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त  फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि शुरू होने का समय (Mahashivratri 2026 shubh muhurat) 15 फरवरी 2026 दिन रविवार को शाम 04:23 pm। चतुर्दशी तिथि समाप्त 16 फरवरी दिन सोमवार की शाम 05:09 मिनट पर। चार प्रहर की पूजा का समय  महाशिवरात्रि पर प्रथम प्रहर की पूजा का समय 15 फरवरी 2026 शाम 05:43 pm से शुरू होकर रात्रि 08:53 मिनट तक रहेग...

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के 5 नियम और सही पूजा विधि

चित्र
महाशिवरात्रि आने वाली है और हम सभी महादेव को प्रसन्न करने की तैयारियों में जुट गए हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा। बचपन से ही हम देखते आए हैं कि शिव पूजा में 'बेलपत्र' का कितना महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि हर कोई अलग-अलग तरीके से बेलपत्र की पत्तियां चढ़ाता है? अक्सर मन में सवाल आता है कि क्या बेलपत्र उल्टा चढ़ना चाहिए या सीधा? क्या 3 से ज्यादा पत्तियों वाला बेलपत्र ज्यादा फलदायी होता है? सच तो यह है कि महादेव जितने 'भोले' हैं, उनकी पूजा के नियम उतने ही वैज्ञानिक और सटीक हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के मुख्य नियम  आज के इस लेख में, मैं आपके साथ शास्त्रों में बताए गए वे गुप्त नियम साझा करूंगा, जो आपकी पूजा को साधारण से विशेष बना देंगे। अगर आप भी इस साल महाशिवरात्रि पर अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने की इन 5 बड़ी गलतियों से जरूर बचें।  भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र (Bilva Patra) का महत्व सर्वोपरि है। अक्सर लोग श्रद्धा में बेलपत्र तो चढ़ाते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ गलतियां कर...

Som Pradosh Vrat Katha: सोम प्रदोष व्रत कथा हिंदी

चित्र
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इस व्रत को करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर प्रकार के ग्रह दोष दूर होकर आरोग्यता और मनोकामना पूर्ति होती है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए  सोम प्रदोष व्रत का महत्व अद्भुत माना जाता है।  सोम प्रदोष व्रत कथा  पूर्व काल में एक विधवा ब्राह्मणी प्रत्येक प्रातः ऋषियों की आज्ञा ले अपने पुत्र को साथ लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती।  भिक्षा में उन्हें जो मिलता, उससे अपना कार्य चलाती और शिवजी का प्रदोष व्रत भी करती थी।    एक दिन जब वह भिक्षा के लिए अपने पुत्र के साथ जा रही थी तो मार्ग में उसे विदर्भ देश का राजकुमार मिला। शत्रुओं ने उसे उसकी राजधानी से बाहर निकाल दिया था और उसके पिता को मार दिया था।  अतः वह मारा मारा फिर रहा था। ब्राह्मणी उसे अपने साथ ले आई और अपने पुत्र के साथ उसका पालन पोषण करने लगी।   एक दिन उन दोनों -राजकुमार और ब्राह्मण बालक ने वन में गंधर्व कन्याओं को देखा। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया परंतु राजकुमार साथ नहीं आया क्योंकि वह अंशुमती नाम की गंधर्व कन्या से बात...