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जनवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Holashtak 2026 Start And End Date: होलाष्टक में क्या होता है?

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जैसा कि हम सब जानते है कि रंगों भरा त्यौहार होली भारत का प्राचीन और मुख्य त्यौहार है। होली से आठ दिन पहले फाल्गुन मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को होलाष्टक शुरू हो कर फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि तक रहता है। होलाष्टक 2026 कब है?  इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 03 मार्च 2026 तक रहेगा। 03 मार्च 2026 को शाम के समय होलिका दहन होगा और 04 मार्च 2026 को आपसी प्यार और सदभाव का त्यौहार होली मनाया जाएगा।  होलाष्टक प्रारंभ: 24 फरवरी 2026, मंगलवार (अष्टमी तिथि सुबह 07:01 से शुरू)। होलाष्टक समाप्त: 3 मार्च 2026, मंगलवार (होलिका दहन के साथ)।  होलिका दहन मुहूर्त: 3 मार्च 2026, शाम 06:22 से रात 08:50 तक। रंग वाली होली (फाग) : 4 मार्च 2026, बुधवार। होलाष्टक में क्या न करें?  आपने होलिका दहन की कहानी अवश्य सुनी होगी कि भक्त प्रह्लाद की बुआ होलिका, जिसे यह वरदान प्राप्त था कि अगर वह अपनी चुनरी औढ़ कर अग्नि में प्रवेश करें तो अग्नि उसे जला नही सकती।  परंतु देव कृपा से होलिका की वह चुनरी उड़कर भक्त प्रह्लाद को लिपट गई और वह अग्नि में जलने से बच गए और होलिका अग्नि में ...

Laxmi Mata ki Aarti: ॐ जय लक्ष्मी माता आरती

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धन वैभव और समस्त सुखों की देवी लक्ष्मी माता की आरती और पूजा हर नर नारी बड़े ही भक्ति भाव से करता है और हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्यौहार दीवाली  पर तो लक्ष्मी पूजन का विधान है जिसमे गणेश जी, माता लक्ष्मी और देवी सरस्वती एवं कुबेर देवता की पूजा अर्चना की जाती है। लक्ष्मी माता की आरती  मैया जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता  तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता  ओम जय लक्ष्मी माता  उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता   सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता  ओम जय लक्ष्मी माता  दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता  जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ओम जय लक्ष्मी माता  तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता  कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता  ओम जय लक्ष्मी माता   जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता  सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता  ओम जय लक्ष्मी माता  तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता  खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता  ओम जय लक्ष्मी माता  शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-ज...

सोमवती अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के चमत्कारी उपाय

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सोमवती अमावस्या पर पितृदोष शांति के उपाय हिंदू शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए है। जब   अमावस्या तिथि सोमवार को आए, उसे सोमवती अमावस्या  कहा जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन किए गए पितृदोष शांति के उपाय जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति दिलाते है। पितृदोष के कारण धन, संतान, विवाह, स्वास्थ्य और ग्रह क्लेश से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है, इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति हेतु विशेष पूजा, दान और कुछ सरल उपाय करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।  शास्त्रों में इस इस दिन कुछ विशिष्ट पितृदोष निवारण के उपाय बताए गए है जिनसे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण किया जा सकता है।  अगर आपके जीवन में लगातार दुःख बने रहते है, कार्यों में मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती और लगातार धन का अभाव रहता है तो ये पितृदोष के लक्षण है। अन्य लक्षणों में संतान के भी कार्यों में बाधाएं और उनके विवाह में देरी भी पितृदोष को दिखाती है। सोमवती अमावस्या को पितृदोष के उपाय  पितृदोष से पीड़ित व्यक्ति सोमवती अमावस्या ...

Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत कथा विधि और महत्व

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सोलह सोमवार व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत है। मनोरथ सिद्धि के लिए सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद के लिए सोलह सोमवार का व्रत रखा जाता है। खासकर कुंवारी कन्याएं अपने मनपंसद वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती है।  सोलह सोमवार व्रत की कथा (Solah Somvar Vrat Katha)   मृत्यु लोक में भ्रमण करने की इच्छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्यु लोक में पधारे। भ्रमण करते करते दोनों विदर्भ देश के अंतर्गत अमरावती नाम की अति सुंदर नगरी में पहुंचे।  अमरावती नगरी अमरा पुरी के समान सब प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के राजकुमार द्वारा बनवाया गया अति रमणीक शिव जी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ उस मंदिर में निवास करने लगे।  एक समय माता पार्वती भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देख मजाक करने की इच्छा से बोली - "है प्रभु महाराज ! आज तो हम दोनों चौसर खेलेंगे "  शिव जी ने अपनी प्राण प्रिय पत्नि की बात को मान  लिया और चौसर खेलने लगे।  उसी समय उस मंदिर का पुजारी ब्राह्मण मंदिर में...

Lucky Number: जन्म तिथि और आपका लक्की नंबर

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अंक ज्योतिष के अनुसार, हर व्यक्ति का जन्म किसी विशेष ऊर्जा और अंक के प्रभाव में होता है। यदि आप भी जानना चाहते है कि मेरा लक्की नंबर क्या है?  या मेरे जन्म अंक का स्वामी ग्रह कौन है?  तो आप बिल्कुल सही जगह आए है। इस लेख में हमने एक विशेष टूल दिया है जिसकी मदद से आप अपनी जन्म तिथि डालकर अपना शुभ अंक और उसके स्वामी देवता की जानकारी प्राप्त कर सकते है।  क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म तारीख में ही आपकी सफलता का रहस्य छिपा है? नीचे दिए गए कैलकुलेटर से अपना शुभ अंक और स्वामी ग्रह अभी जानें। How to Know Your Lucky Number & Lord Date of Birth Lucky Number Lord (स्वामी) 01, 10, 19, 28 1 Sun (सूर्य) 02, 11, 20, 29 2 Moon (चंद्र) 03, 12, 21, 30 3 Jupiter (गुरु) 04, 13, 22, 31 4 Uranus (अरुण) 05, 14, 23 5 Mercury (बुध) 06, 15, 24 6 Venus (शुक्र) 07, 16, 25 7 Saturn (शनि) 08, 17, 26 8 Neptune (वरुण) 09, 18, 27 9 Mars (मंगल) राहु और केतु को ज्...

Basant Panchami 2026: Shubh Muhurat & Puja Vidhi

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हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान और विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है।  बसंत पंचमी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त  बसंत ऋतु भारत की छह ऋतुओं में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। भारत में बसंत ऋतु का समय फरवरी से मार्च तक माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है, न तो अधिक ठंड, न ही अधिक गर्मी। पेड़ों पर नई कोंपले आने लगती हैं और कोयल की  मधुर ध्वनि सुनाई देती है। खेतों में सरसों की फसल लहलहाती नजर आती है। सरसों के पीले फूल मनमोहक दृश्य उत्पन्न करते हैं। बसंत पंचमी को भारत में सरस्वती पूजा, बसंत महोत्सव, रति काम महोत्सव और बागीश्वरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। विवरण (Details) तिथि और शुभ समय (2026) बसंत पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रातः 07:15 AM से दोपहर 12:50 PM तक शुभ रंग पीला (Yellow) - उत्साह और ज्ञान क...

Hanuman Chalisa: जय हनुमान ज्ञान गुण सागर

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कलयुग में अगर हो संकटों से परेशान  तो अवश्य करे हनुमान चालीसा  का ध्यान हनुमान चालीसा   ।। दोहा।। श्रीगुरू चरन सरोज रज   निज मनु मुकुरु सुधारि   बरनऊं रघुबर बिमल जसु  जो दायकु फल चारि  बुद्धिहीन तनु जानिके  सुमिरौं पवन-कुमार  बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं  हरहु क्लेस बिकार   ।। चौपाई ।। जय हनुमान ज्ञान गुण सागर  जय कपीश तिहुं लोक उजागर  रामदूत अतुलित बल धामा  अंजनी पुत्र पवन सुत नामा  महाबीर विक्रम बजरंगी  कुमति निवार सुमति के संगी   कंचन वरन बिराज सुवेसा  कानन कुंडल कुंचित केसा  हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे  कांधे मूंज जनेऊ साजे   शंकर सुवन केसरी नंदन  तेज प्रताप महा जग वंदन  विद्यावान गुणी अति चातुर  राम काज करिबे को आतुर  प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया   राम लखन सीता मन बसिया  सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा  विकट रूप धरि लंक जरावा  भीम रूप धरि असुर संवारे   रामचंद्र के काज संवारे  लाय संजीवन लखन ज...

Navgrah Shanti ke Upay। नवग्रह शांति के उपाय और बीजमंत्र

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नवग्रह शांति हिंदू ज्योतिष का एक अत्यंत शक्तिशाली उपाय है जिसके माध्यम से कुंडली में मौजूद नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत किया जाता है। सूर्य, चंद्र, गुरु, बुध, शुक्र, शनि, मंगल, राहु और केतु- इन नवग्रहों के बीजमंत्र के नियमित जाप से जीवन में आने वाली अनेक प्रकार के कष्ट, ग्रह दोष, साढ़ेसाती, ढैया और मानसिक तनाव से राहत मिलती है। नवग्रहों की शांति पूजा और बीजमंत्र की साधना से धन, स्वास्थ्य, व्यवसाय और पारिवारिक सुखों में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  अशुभ ग्रहों के दोष निवारण के उपाय एवं बीजमंत्र  सूर्य -  कोई भी शुभ कार्य आरम्भ करने से पहले गुड़ या मिठाई आदि खाएं एवम् पानी पीएं। सूर्य देव के बीजमंत्र  ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः का जाप किया जा सकता है। चन्द्र -  बुजुर्गो का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले। चंद्र देव के बीजमंत्र  ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः का जाप किया जा सकता है। मंगल -  आंखों मे सफेद सुरमा लगाएं। मंगल देव के बीजमंत्र  ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः  का जाप करें। बुध - दांतो को साफ रखे, नाक छिदवाए। बुध देव के बीज...

Lal Kitab Ke Totke for Karj Mukti: कर्ज मुक्ति के अचूक उपाय और टोटके

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वैसे तो कर्ज लेने से यथा संभव बचना चाहिए और कर्ज लेना किसी को भी अच्छा नहीं लगता, परंतु कई बार किसी मजबूरी वश बच्चो की शिक्षा, गाड़ी, मकान या किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण कर्जा लेना ही पड़ता है। जीवन में कई बार कठिन समय आने पर व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस जाता है। अगर आप भी कर्ज के जाल में फंसे हुए है और कर्ज उतारने के उपाय खोज रहे है, तो लाल किताब ( Lal Kitab) में इसके बहुत ही प्रभावशाली समाधान दिए गए है। आइए जानते है लाल किताब कर्ज मुक्ति के चमत्कारी उपायों के बारे में- लाल किताब कर्ज़ मुक्ति के उपाय  कई बार गलत समय पर कर्ज लेने से या किसी अन्य कारण से उसे उतारना बहुत ही मुश्किल हो जाता है और कई बार तो कुछ कर्जों को उतारते उतारते या ब्याज भरते भरते पूरी जिंदगी ही निकल जाती है परंतु कर्जा खत्म होने का नाम नहीं लेता। कई बार छोटा सा कर्ज भी खत्म होने का नाम नहीं लेता क्योंकि जब कर्ज लिया जाता है तो किसी मजबूरी वश या जीवन स्तर को सुधारने के लिए कोई काम करने के लिए या काम को बढ़ाने के लिए लिया जाता है या मकान, दुकान आदि खरीदने के लिए कर्ज लिया जाता है और परेशानी तब आती है।  जब ...

Janam Kundli Kaise Dekhen: जन्म कुंडली देखने का सबसे सरल तरीका

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अक्सर आप ने जन्म कुण्डली के बारे में सुना होगा, परन्तु इस आसानी से आप अपनी या किसी की भी जन्म कुंडली देख सकते है, ये आप ने नही सोचा होगा। यहां दिए गए साधारण  तरीके से आप ऐसा कर सकते है। किसी भी कुंडली मे 12 खाने या घर होते है जिन्हे भाव कहा जाता है।  पहले घर को लग्न या पहला भाव कहा जाता है और लगन से अगला दूसरा भाव और तीसरा तीसरा भाव कहलाता है। आपके जन्म कुंडली के लग्न में एक से बारह तक कोई भी अंक हो सकता है। इन का भाव वार विश्लेषण इस तरह से किसी जाता है- कुंडली के 12 भावों का महत्व कुंडली का भाव (House) जीवन के क्षेत्र (Representations) प्रथम भाव (लग्न) रंग, रूप, स्वभाव, कद, आयु, यश और व्यक्तित्व द्वितीय भाव धन, कुटुंब, वाणी, प्रारंभिक शिक्षा और भोजन तृतीय भाव साहस, पराक्रम, छोटे भाई-बहन और परिश्रम चतुर्थ भाव सुख, माता, वाहन, जायदाद और हृदय पंचम भाव संतान, बुद्धि, विद्या, प्रेम संबंध और अचानक धन लाभ षष्ठ भाव ...

रविवार व्रत कथा: सूर्य देव की पूजा, विधि और महत्व

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रविवार व्रत कथा हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना से जुड़ी एक अत्यंत पवित्र कथा है। सूर्य देव को आरोग्य, यश, तेज और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है। जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य देव का रविवार का व्रत रखते है, उनके जीवन में रोग, दरिद्रता और ग्रह दोष दूर होते है। सूर्य देव का व्रत और पूजा उपासना राज सम्मान दिलवाती है और राज भय दूर होता है। रविवार व्रत पूजा विधि और नियम रविवार का व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। मान सम्मान में वृद्धि और शत्रु क्षय करने वाला व्रत रविवार का व्रत कहलाता है।  प्रात: काल स्नानादि से निवृत होकर  स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पवित्र स्थान को लीपकर भगवान सूर्य देव की पूजा करें। शांत चित होकर परमात्मा का स्मरण करें।  भोजन एक समय ही करें, तेल व नमक युक्त भोजन न ग्रहण करें। भोजन तथा फलाहार सूर्य अस्त होने से पहले ही कर लेना चाहिए।  यदि भोजन करने से पहले सूर्य छिप जाए तो दूसरे दिन सूर्य के उदय हो जाने पर सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करें। व्रत के अंत में कथा सुननी चाहिए।  रविवार व्रत की कथा  एक बुढ़िया थी। वह प...

मकर संक्रांति 2026: तिथि, मुहूर्त और तिल-गुड़ का महत्व

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मकर संक्रांति 2026 हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे सूर्य देवता के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन तिल-गुड़ और रेवड़ी का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे इस पर्व पर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता   है। मकर संक्रांति पर स्नान- दान और पूजा पाठ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।  मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Ka Shubh Muhurat) हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी 2026 बुधवार को शाम 03.13 pm पर होने जा रहा है। उदया तिथि 14 जनवरी को प्राप्त हो रही है, इसलिए इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।  मकर संक्रांति पुण्यकाल मुहूर्त - 14 जनवरी 2026 शाम 03:13 pm से शाम 05:45 pm तक मकर संक्रांति महा पुण्य काल मुहूर्त - 14 जनवरी 2026 शाम 03.43 pm से 14 जनवरी शाम 04:58 pm तक पंजाब, हरियाणा में इसे संक्रांति या संगराद और उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति को संक्रांति या उतरायण के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड में उतरायणी तो गुजरात में उतरायण के नाम से जाना जाता...